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कुपोषण को मात दे सेहतमंद हो रहे बच्चे,परिजनों की लौट रही मुस्कान

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जौनपुर। जिले में कुपोषण की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। बच्चे कुपोषण को मात देकर सेहतमंद हो रहे हैं, जिससे उनके परिजनों में मुस्कान लौट रही है। पोषण पुर्नवास केंद्र में चार माह में जहां 14 बच्चे ठीक होकर घर पहुंचे हैं। वहीं, छह में विभाग की ओर से 1513 कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाया गया है। यह असर लोगों के कुपोषण के प्रति जागरूकता का है। कारण विभाग की ओर से एक ओर सरकारी योजनाओं का लाभ अच्छे तरीके से दिया जा रहा है। वहीं, समय-समय पर जागरूकता अभियान चलना है।
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कुपोषण से बच्चों को बचाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाओं का संचालन किया गया है, जिसे जिले में परवान चढ़ाने का कार्य बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से किया जा रहा है। जिले में ऐसे क्षेत्रों का चयन कर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जहां कुपोषण बच्चों की संख्या अधिक है। इस दौरान लोगों को बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए सुझाव दिया जा रहा है। साथ ही पौष्टिक आहार लेने, सरकारी योजनाओं को लाभ लेने, सरकारी अस्पतालों में उपचार कराने, साफ-सफाई रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जिले में इस समय 50 हजार 996 कुपोषित बच्चों की संख्या है, जबकि छह माह पहले इनकी संख्या 52 हजार 509 हैं। इस दौरान तकरीबन 1513 कुपोषित बच्चे सेहतमंद होकर घर लौट गए हैं। वहीं, पोषण पुनर्वास केंद्र पर नजर दौड़ाई जाई तो चार माह में कुल 41 कुपोषण के शिकार बच्चे भर्ती हुए थे, जिसमें 14 बच्चे स्वस्थ होकर अपने घर चले गए हैं।
एनआरसी में स्वस्थ्य हुए बच्चों का आंकड़ा
माह - भर्ती कुपोषित बच्चे - स्वस्थ हुए बच्चे
नवंबर - 12 - 5
दिसंबर - 12 -5
जनवरी 6- 4
फरवरी 11 -1
केस एक
करंजाकला ब्लाक के डाल्हनपुर की सलोनी तीन वर्ष से कुपोषित थी। उसका वजन कराया गया था तो वह तीन किलो की थी। जिसके बाद विभाग की ओर से उसे एनआरसी में भर्ती कराकर उपचार कराया गया, जिसके बाद वह स्वस्थ होकर घर लौट गई।
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केस दो
कोठवार गांव के राजवीर दो वर्ष से कुपोषित थे। अभियान के दौरान उसका वजन मात्र ढाई किलो का था। इसके बाद एनआरसी में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार किया गया। वह कुपोषण की जंग जीत कर अब पूरी तरह स्वस्थ है।
वर्जन...
विशेष अभियान चलाकर कुपोषण के प्रति जागरूक करने का कार्य किया जाता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को रोज कुपोषित बच्चों के घर जाकर परिजनों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, पौष्टिक आहार खाने के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जिसके कारण जिले में कुपोषित बच्चे सेहतमंद हो रहे हैं। - डा. आरबी सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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