छोटे दलों को बड़ी सफलता
पंचायत चुनाव कई छोटे दलों ने बड़ी सफलता हासिल की है। इसमें अपना दल-एस प्रमुख है। इस पार्टी के छह प्रत्याशी जिला पंचायत सदस्य बने हैं। यह सारी सीटें मड़ियाहूं तहसील क्षेत्र की हैं। पार्टी का ज्यादा प्रभाव भी इसी क्षेत्र में है और यहां की विधायक भी इसी पार्टी से हैं। इसके अलावा उलेमा कौंसिल और एआईएमआईएम ने एक-एक तो आप ने तीन सीटें जीतकर सबको चौंका दिया है। बसपा के खाते में भी भाजपा के बराबर दस सीटें (वार्ड संख्या 6, 9, 12, 13, 22, 25, 30, 51, 78 व 81) आई हैं, जबकि पार्टी ने सिर्फ 60 सीटों पर ही प्रत्याशी उतारे थे।
इन कारणों से मिली शिकस्त
* गुटबाजी: भाजपा की हार में यह सबसे बड़ा कारण रहा। दिन-रात सेवा के बाद भी टिकट न मिलने से मायूस कार्यकर्ता निर्दल ही मैदान में उतर गए। बाद में पार्टी ने उन्हें निष्कासित भी कर दिया। इससे कार्यकर्ता हतोत्साहित हुए। खुद तो हारे ही पार्टी प्रत्याशी की जीत की राह कठिन कर दी।
* कमल निशान पर भरोसा: चुनाव में भाजपा ने प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया था, लेकिन चुनाव निशान साथ नहीं था। हर प्रत्याशी को अलग-अलग निशान आवंटित हुए थे। मतदाताओं को इसे समझाने में भी देर हुई।
* जनप्रतिनिधियों की दूरी: वर्ष 2022 का सेमीफाइनल माने जाने के बाद भी पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने अपनी सक्रियता को शिथिल रखा। वह बंगाल में वोट मांगते रहे, लेकिन अपने इलाके में जनता से जुड़ने की जरुरत नहीं समझी। उनकी सक्रियता मतदान के बाद बढ़ी, तब तक मतगणना की घड़ी आ गई।
कुछ दिनों से लगातार बाहर हूं। बस फोन पर ही संपर्क हो पा रहा है। जल्द ही सबसे मिलकर परिणाम की समीक्षा की जाएगी, जो भी होगा उससे नेतृत्व को अवगत कराया जाएगा। जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख पद के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। -पुष्पराज सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा।