चारा के अभाव में दम तोड़ रहे पशु
- 12 दिनों में मौत के गाल में समा चुके हैं कृषि भवन स्थित गोशाला में रखे 15 पशु
- अभी भी लगभग 10 पशु हैं बीमार, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का हाल और भी बुरा
संवाद न्यूज एजेंसी
जौनपुर। ठंड में बेहतर उपचार और मानक के अनुसार चारा नहीं मिल पाने से पशु आश्रय स्थलों में रखे पशु दम तोड़ रहे हैं। शहर के पॉलीटेक्निक चौराहा स्थित कृषि भवन परिसर में बने अस्थाई पशु आश्रय में आए दिन पशुओं की मौत हो रही है। शनिवार को पांच पशुओं की जहां मौत हो गई, वहीं लगभग 10 पशु बीमार चल रहे हैं। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित पशु आश्रय स्थलों का हाल इससे भी बुरा है।
किसानों की फसलें नुकसान न हो, इसके लिए जिले में अस्थाई पशु आश्रय बनाकर छुट्टा पशुओं को रखने का कार्य किया जा रहा है। इन पशुओं की देख भाल के लिए सफाई कर्मियों को रखा गया है। वहीं एक पशु को 30 रुपया का चारा भी खाने को दिया जा रहा है। पशुओं का उपचार करने के लिए संबंधित पशु चिकित्साधिकारी को भी लगाया गया है। लेकिन पशु पर्याप्त चारा नहीं मिलने और उपचार के अभाव में आए दिन दम तोड़ रहे हैं। शहर के पालिटेक्निक स्थित कृषि भवन परिसर में बने अस्थाई पशु आश्रय में कुल 455 पशु थे । जिसमें लगभग 10 पशु इस समय बीमार हैं। वहीं 12 दिनों में 15 पशु दम तोड़ चुकें हैं। जिसमें एक ही दिन शनिवार को पांच पशु मौत के गाल में समा चुके हैं।
इनसेट:
तय धनराशि एक पशु के चारे के लिए नहीं है पर्याप्त
जौनपुर। सरकार द्वारा निर्धारित धनराशि एक पशु के चारे के लिए पर्याप्त नहीं है। जिससे पशु बीमार होकर मर रहे हैं। पशु चिकित्सकों की मानें तो एक सामान्य पशु को एक दिन में पांच किग्रा भूसा, 1.50 से दो किग्रा दाना व 10 किग्रा हरा चारा खाने के लिए दिया जाना चाहिए। लेकिन 30 रुपये में इतना चारा मिल पाना मुश्किल है। कम चारा मिलने से पशुओं में तमाम तरह की बीमारियां फैल रही है।
इनसेट:
निर्माणाधीन सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में गाड़े जाते हैं मरे पशु
जौनपुर। पॉलीटेक्निक स्थित कृषि भवन परिसर के अस्थाई पशु आश्रय में मरने वाले पशुओं को कुल्हनामऊ में निर्माणाधीन सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में गाड़ा जाता है।नगर पालिका पशुओं के मरने की सूचना पाते ही जेसीबी से उठाकर पशु वाहन में भरकर उक्त प्लांट में ले जाकर गाड़ दिया जात है। जिसकी भनक भी किसी को नहीं लग पाती है।
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कोट:
पशुओं की रोज सुबह नौ बजे से लेकर 11 बजे तक जांच की जाती है। बीमार पशुओं का उपचार भी किया जाता है।पर्याप्त चारा नहीं मिलना भी पशुओं के बीमार होकर दम तोड़ने का एक कारण है, लेकिन एक ही स्थान पर रहने से इन पशुओं में तेजी से बीमारियां फैल रही है, जिससे पशुओं की मौत हो रही है। -डॉ.संदीप अग्रवाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी, कृषि भवन गोशाला।