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कथक नृत्य पर मनीष और ऋचा ने बांधा समा

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20- पूविवि के आर्यभट सभागार में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अंतिम दिन मनीष और ऋचा के कथक ने ? - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। पूर्वांचल विश्वविद्यालय में शुक्रवार की रात आयोजित सांस्कृतिक संध्या में ठुमरी और तराने से राजेंद्र सिंह रज्जू भैय्या संस्थान का सभागार आर्यभट्ट सभागार गूंज उठा। ठुमरी की धुन ने जहां श्रोताओं को आनंदित किया, वहीं कथक नृत्य में मनीष शर्मा और ऋचा पांडेय की घूंघरू की खनक पर लोग झूम उठे।
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समारोह का शुभारंभ प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पं.सत्यप्रकाश मिश्र ने राग यमन से की। इसके बाद उन्होंने राम रूप अनुरागी अखियां, श्याम बरन मन भरन... बंदिश सुनाई। पिया ले गयो रे मेरा सांवरिया लय... और आज जाने की जिद ना करो... गजल सुना कर खूब तालियां बंटोरी। उनके साथ तबले पर लालजी मलिक, तानपुरा पर आकर्ष श्रीवास्तव, ढोलक पर गुरु प्रसाद और सह गायक करमचंद्र रहे। विवि के कुलपति प्रो.राजाराम यादव के कैसे करी बरजोरी... गीत पर पूरा हाल तालियों से गूंज उठा। इसके बाद ना मानूंगी पिया प्यारे तोरे कृष्ण की मनाए बिन... का आनंद दर्शकों ने उठाया। बंगलुरु से आए प्रो. गोपाल कृष्ण राव ने तबले पर संगत की। बनारस घराने से आए कथक नृत्यांगना मनीष शर्मा और ऋचा पांडेय ने शिव वंदना पर जोरदार जुगलबंदी की। राधा-कृष्ण के प्रेम का वर्णन करते हुए नृत्य की प्रस्तुति की। मनीष और ऋचा के घूंघरू के सवाल का जवाब तबले से विनोद मिश्र दे रहे थे। कथक में हारमोनियम पर गौरव मिश्र, तबले पर विनोद मिश्र, बांसुरी पर ऋषभ राज और सारंगी पर अंकित मिश्र ने संगत की। सभी कलाकारों को कुलपति प्रो.राजाराम यादव, प्रो.भीम सिंह और प्रो.बीबी तिवारी ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। समारोह का संचालन डॉ.मनोज मिश्र ने किया।
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