उन्होंने बताया- मैंने उन्हें सुबह 10 बजे के करीब फोन किया था, तब उन्होंने बताया कि मोदी जी सब ठीक कर लेंगे, कोई परेशानी नहीं है। लेकिन डेढ़ घंटे बाद उन्होंने फिर फोन किया तो आशीष नर्वस नजर आए और बोले अब यहां की स्थिति बिगड़ रही है। हालांकि शाम तक भारत से दूतावास में फंसे लोगों को लाने के लिए विशेष विमान का प्रबंध किया गया। लेकिन, काबुल हवाई अड्डे पर अत्यधिक भीड़ होने के कारण कोई निकल नहीं पाया। अगले दिन 16 अगस्त को उड़ानें रद्द हो गईं। इसके चलते वह पूरी तरह से नर्वस हो गए।
मगर, रात में भारत का विशेष विमान वहां पहुंच गया और वे विमान तक पहुंचे। 17 जुलाई की सुबह करीब 11 बजे गुजरात के जाम नगर पहुंचे। परिवार वालों के मुताबिक उन्होंने उतरते ही किसी के मोबाइल नंबर से वीडियो कॉल किया। उन्होंने भारत माता की जयकारे लगाते हुए कहा कि बजरंग बली की कृपा और मोदी जी के प्रयास से मैं भारत आ गया हूं।
वहां जाने के बाद मुझे पता चल गया कि मेरा भारत क्यों सबसे अच्छा है। हालांकि शाम को ही सवा पांच बजे हिंडन एयरवेज गाजियाबाद स्थित कैंप में भेज दिए गए। परिवार के लोगों के मुताबिक यदि सबकुछ ठीकठाक रहा तो क्वारंटाइन अवधि पूरी करने के बाद वह घर भी आएंगे, जिसका पूरे परिवार को बेसब्री से इंतजार है।