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एक दिन बाद पितरों का दिन, गंदगी भरे घाटों से होगा तर्पण

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हनुमान घाट पर फैला बालू व कंकड। संवाद - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। पितृपक्ष 20 सितंबर से शुरू होरहा है। लेकिन अभी भी हनुमान घाट, सूरज घाट, अचला घाट पर कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। बारिश के दौरान गोमती नदी का जलस्तर बढ़ गया है। वहीं, घाटों के आसपास हर ओर गंदगी फैली है। ऐसे में लग रहा है साफ-सफाई और अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कदम न उठाए जाने पर लोगों को गंदगी में ही घाट पर पितरों का तर्पण करना पड़ेगा।
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20 सितंबर से शुरू हो रहे पितृपक्ष के दौरान अपने पुरखों को याद कर तर्पण किया जाएगा। इसके लिए हर साल नगर पालिका प्रशासन द्वारा हनुमान घाट पर साफ-सफाई आदि की व्यवस्था की जाती रही है। लेकिन, इस बार ऐसा कुछ भी नहीं देखने को मिल रहा है। घाट पर चल रहे काम की वजह से निर्माण सामग्री वहीं रखी गई है। वहीं, इन दिनों हो रही बारिश के कारण घाट पर कीचड़ फैल गया है, जिसके कारण फिसलन भी बढ़ गई है। वहीं, इस संबंध में ईओ संतोष कुमार मिश्रा का कहना है कि परंरागत तरीके से साफ-सफाई कराई जाएगी। इसके लिए नगर पालिका के कर्मचारियों को लगाया गया है।
पंडित देवी प्रसाद मिश्र बताते हैं कि इस वर्ष श्राद्ध पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के दिन यानि 6 अक्टूबर 2021 को होगा। यदि पूरी श्रद्धा के साथ पितरों की पूजा अर्चना करने के साथ तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। पंडित मुरारी श्याम पांडेय बताते हैं कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार देह त्याग करने के बाद हमारे पुरखे परलोक सिधार जाते हैं और उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए सच्ची श्रद्धा के साथ तर्पण किया जाता है, उसे ही श्राद्ध कहा जाता है। ऐसी मान्याता है कि मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध पक्ष में जीवात्मा को मुक्ति प्रदान कर देते हैं, ताकि वे स्वजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें। इस दौरान जिस मृत परिजन को स्मरण कर तर्पण किया जाता है, उसे ही पितर कहा जाता है।
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