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दो वर्षों में मिले मलेरिया के 24 मरीज

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मलेरिया पर नियंत्रण पाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में हर साल 12-12 मलेरिया रोगी मिले हैं। इससे अधिक मरीज एक भी बार नहीं मिले।
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यह जानकारी जिला मलेरिया अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि जागरूकता बढ़ाने के के लिए 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। आबादी वाले क्षेत्रों में मच्छरों का घनत्व जितना कम होगा, उतने ही ज्यादा लोग सुरक्षित होंगे। मलेरिया पर नियंत्रण के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन स्रोतों को नष्ट कराया जा रहा है। एंटी लार्वा का छिड़काव तथा फागिंग भी कराई जा रही है। बुखार पीड़ित सभी रोगियों की जांच के लिए सीएचसी एवं पीएचसी केंद्रों को निर्देशित किया गया है। इन कार्यों की मानीटरिंग एवं सहयोगात्मक पर्यवेक्षण के लिए जिले के सभी पांच मलेरिया निरीक्षकों को 21 ब्लॉक आवंटित किए गए हैं। मार्च माह के अंत तक 7,774 रोगियों की मलेरिया जांच की जा चुकी है, लेकिन कोई भी मलेरिया धनात्मक नहीं मिला है। मलेरिया मादा एनीफिलीज मच्छर काटने से होता है। मलेरिया पीड़ित रोगी को ठंड देकर नियमित अंतराल पर बुखार आता है और बुखार कम होते वक्त पसीना होता है। समय पर दवा नहीं मिलने पर रोगी अत्यधिक कमजोर हो जाता है। मलेरिया से बचाव के लिए सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए। आसपास गंदा पानी इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए। साफ-सफाई रखनी चाहिए। बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। सीएचसी व पीएचसी पर जांच की सुविधा उपलब्ध है। कूलर, गमला, टिन का डिब्बा, नारियल का खोल, डिब्बा, फ्रीज के पीछे का डीफ्रास्ट ट्रे की सफाई नियमित करनी चाहिए।
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