जौनपुर। गोमती नदी नमामि गंगे योजना का हिस्सा बन सकती है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमाभारती को स्वच्छ गोमती अभियान की तरफ से गोमती एक्शन प्लान सौंपा गया। जिस पर मंत्री ने भौतिक सत्यापन कराने का अधिकारियों को निर्देश दिया है। यह प्लान आईआईटी रूड़की, दिल्ली और बीएचयू के वैज्ञानिकों और अभियंताओं द्वारा तैयार किया गया है। इस पर तकरीबन 389 करोड़ खर्च होगा।
पीलीभीत से लेकर जौनपुर होते 930 किलोमीटर गोमती नदी का दायरा है। यह नदी गाजीपुर कैथी में गंगा में मिलती है। भूजल आधारित यह नदी इन दिनों प्रदूषित हो गई है। इसको प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए स्वच्छ गोमती अभियान के हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष प्रो. इंद्रमणि मिश्र (आईएसएम धनबाद) एवं संरक्षक प्रो. विजय नाथ मिश्र के निर्देशन में वैज्ञानिकों और अभियंताओं द्वारा प्रोजेक्ट तैयार किया गया। इसे तैयार करने में तकरीबन डेढ़ वर्ष लग गए। आईआईटी रूड़की के प्रो. विवेक, प्रो. विमल चंद्र श्रीवास्तव ने जौनपुर में प्रवास कर पानी की सैंपलिंग की। और नदी में बह रहे नालों का क्लोरेट नापा। इसमें आईआईटी रूड़की के तमाम पीएचडी स्कालरों ने भी सहयोग किया। कलीचाबाद से रामघाट दस किलोमीटर तक की दूरी में 21 बड़े नाले नदी में गिर रहे हैं। इसमें एसटीपी लगाए जाने, नालों को एक दूसरे से पाइप लाइन द्वारा जोड़कर नदी के दोनों तरफ शोधन संयंत्र लगाए जाने की व्यवस्था की गई है। साथ ही प्रोजेक्ट में जगह-जगह पंपिंग स्टेशन बनाए जाने और नदी के निचले जलधारा में दूसरी ओर एसटीपी लगाने, समय समय पर पानी की रिसर्च लैब के निर्माण की आवश्यकता जताई गई है।
स्वच्छ गोमती अभियान के जिला संयोजक गौतम गुप्ता ने बताया कि नई दिल्ली स्थित शक्ति भवन में जल संसाधन मंत्री को प्रोजेक्ट सौंपा गया। जिस पर उन्होंने भौतिक सत्यापन कराने का अधिकारियों को निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि नमामि गंगे में गोमती नदी को शामिल किए जाने की मांग की गई है।