फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जाट-मुस्लिम वोट पर यूपी में घमासान

Tue, 24 Dec 2013 03:00 PM IST
अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
विज्ञापन
चौधरी चरण सिंह के नाम पर वेस्ट यूपी में सियासी बिसात बिछ गई है। सोमवार को रालोद जहां जाट-मुस्लिम समीकरण जुटाकर अपनी खोई ताकत को फिर से पाने का अहसास कराने में कामयाब नजर आ रही थी।
विज्ञापन


वहीं भाजपा भी मुजफ्फरनगर में चौधरी चरण सिंह के नाम पर रैली कर जाट वोटों को साधने का प्रयास कर रही थी।

मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर, बुलंदशहर, गाजियाबाद जिलों में जाट-मुस्लिम समीकरण काफी प्रभावी रहता है। रालोद की राजनीति का आधार भी यही रहा है।

लेकिन मुजफ्फरनगर दंगों ने उसके इस सियासी गठजोड़ को छिन्न-भिन्न कर दिया था। इस डैमेज कंट्रोल को रोकने के लिए रालोद दो माह से सक्रिय था। सोमवार को हुई रैली में किसी तरह उसकी भरपाई भी होती नजर आई।
विज्ञापन


पढ़ें, यूपी में क्रिसमस पर 500 ईसाई बनेंगे हिंदू

हालांकि, वह मुस्लिमों को उस तरह जोड़ने में कामयाब नजर नहीं आया, जिसकी उम्मीद इस रैली में की जा रही थी। लेकिन जाटों की नाराजगी को दूर करने में रालोद लगभग कामयाब होता नजर आया।

हालांकि, इसके पीछे जाट आरक्षण का पैंतरा पूरी तरह प्रभावी रहा, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।

दूसरी तरफ, रालोद से नाराज जाटों को अपनी तरफ मोड़ने के लिए भाजपा भी दो माह से जुटी है। इसी प्रयास में उसने भी जिस तरह मुजफ्फरनगर में सोमवार को ही तीन जिलों की रैली आयोजित की, वह चौंकाने वाली थी।

पढ़ें, 'गांधी या गोड्से में से किसे चुनना है, आप तय करें'

चौधरी चरण सिंह की जयंती पर भाजपा की इस रैली में भी अच्छी भीड़ जुटी। यह बात अलग है कि भाजपा की इस रैली में जाटों से ज्यादा गुर्जर, ठाकुर और अन्य बिरादरियों की भी भागीदारी रही।
विज्ञापन


वहीं इनके बीच चौधरी चरण सिंह की जयंती पर प्रदेश सरकार द्वारा सार्वजनिक अवकाश घोषित करना भी सियासी दांव माना जा रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें