महाकुंभ के पहले ही शाही स्नान मकर संक्रांति पर संगम क्षेत्र में अनेकता में एकता की तस्वीर सामने आई। मेले में देश की विविध संस्कृति के दर्शन हुए। इस दौरान संगम की रेती पर जहां गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब सहित देश के पूर्वोत्तर के अनेक भागों के साथ विदेश से भी श्रद्धालु पहुंचे। अलग-अलग बोली, त्योहार और पहचान होने के बाद भी सभी की कामना पवित्र संगम में स्नान करने के साथ मोक्ष पाना रहा। इन श्रद्घालुओं ने संगम क्षेत्र को जनगण मन का प्रतिरूप बताया।
मकर संक्रांति पर कुंभ क्षेत्र पहुंचे गुजरात के हिम्मत भाई पहली बार संगम आए हैं। इस पवित्र तीर्थ के बारे में लंबे समय से सुन रखा था, यहां जन आस्था देखकर लगा कि आखिर में लोग क्यों गंगा-यमुना एवं सरस्वती के पवित्र संगम पर आते हैं। पहली बार यहां परिवार के साथ पहुंचकर अच्छा लगा। वह देश में अमन चैन बना रहे ऐसी कामना करते हैं। उड़ीसा के भुवनेश्वर से आए भजमन बेहड़ा ने कहा कि कुंभ के दौरान पहली बार आए हैं, इससे पहले प्रयाग घूमने आ चुका हूं। पूरे परिवार के साथ यहां पहुंचकर लोक-परलोक सुधारने आया हूं।
महाराष्ट्र के जलगांव से जीतू पाटिल युवा हैं, वह अपने माता-पिता को संगम स्नान कराने आए हैं। उनका कहना था कि समाचार माध्यमों में मेले के महात्म्य के बारे में सुनकर दो महीने से टिकट रिजर्व करवा रखा था। पहली बार शाही स्नान देखकर उन्होंने अखाड़ों को भारतीय संस्कृति का प्रतीक बताया। कर्नाटक के चिकमंगलूर से आए जनार्दन पवित्र संगम में डुबकी लगाने के बाद तृप्त नजर आए। उन्होंने कहा कि इस पवित्र संगम पर लगता है कि गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर की परिकल्पना साकार हो रही है। उन्होंने संगम क्षेत्र को जन गण मन की सजीव तस्वीर बताया। वह इस पवित्र क्षेत्र से देश की एकता का संदेश देने की बात कहते हैं।