कोंच। पितृपक्ष 20 सितंबर से प्रारंभ होकर 6 अक्तूबर तक चलेगा। आश्विन मास कृष्ण पक्ष की अमावस्या अर्थात सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या बुधवार को है। इस दिन 11 साल बाद गजछाया योग बना रहा है। अखिल भारतीय सनातन धर्म रक्षिणी सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योतिर्विद संजय रावत शास्त्री ने बताया कि इस दिन कुमार योग और सर्वार्थसिद्ध योग भी है। इस दिन सूर्य, चंद्रमा, मंगल और बुध ग्रह मिलकर कन्या राशि में चतुर्थ ग्रही योग बना रहे हैं। ऐसे में श्राद्ध करना अत्यंत ही चमत्कारिक फल देने वाला होगा।
उन्होंने बताया कि 6 अक्तूबर को सूर्य और चंद्रमा दोनों ही सूर्योदय से लेकर रात्रि तक हस्त नक्षत्र में होंगे। अमावस्या के दिन यह विशिष्ट योग सूर्योदय से शाम के करीब 5.15 बजे तक रहेगा। इस स्थिति को ही गजछाया योग कहते हैं। कहा जाता है कि जब सूर्य हस्त नक्षत्र पर हो और त्रयोदशी के दिन मघा नक्षत्र होता है तब गजछाया योग बनता है। शास्त्रों के अनुसार इस योग में श्राद्ध कर्म अर्थात तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोज, घी मिश्रित खीर का दान, वस्त्र दान आदि करने से पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। यह योग उनकी मुक्ति और तृप्ति के लिए उत्तम योग है। गजछाया योग में किए गए श्राद्ध और दान से पितरों की अगले 12 सालों के लिए क्षुधा शांत हो जाती है। यह श्राद्धकर्म के लिए अत्यंत शुभ योग है। इस योग में श्राद्ध कर्म और पितृ पूजा करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है। साथ ही घर में सुख शांति एवं समृद्धि बनी रहती है। पितृपक्ष में गजछाया योग होने पर तर्पण और श्राद्ध करने से वंश वृद्धि, धन संपत्ति और पितरों से मिलने वाले आशीर्वाद प्राप्त होते है। जो पितृ उनकी तिथि पर नहीं आ पाते हैं या जिन्हें हम नहीं जानते हैं उन भूले-बिसरे पितरों का भी इसी दिन श्राद्ध करते हैं। अत: इस दिन श्राद्ध जरूर करना चाहिए। अगर कोई श्राद्ध तिथि में किसी कारण से श्राद्ध न कर पाया हो या फिर श्राद्ध की तिथि मालूम न हो तो सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या पर श्राद्ध किया जा सकता है। मान्यता है कि इस दिन सभी पितर आपके द्वार पर उपस्थित हो जाते हैं।