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18 ट्रेनों से हटे महिला कोच, महिलाएं परेशान

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कल्पना - फोटो : ORAI
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उरई (जालौन)। सरकार एक ओर जहां ट्रेनों में पिंक कोच लगवाने की बात कह रही है वहीं प्रमुख ट्रेनों से बिना किसी पूर्व सूचना के महिला कोच हटाकर आधी आबादी की मुश्किलें और बढ़ाई जा रही है। जिन ट्रेनों से महिला कोच हटाए गए हैं उन ट्रेनों में एलएचबी (लिंक हाफमैन बुश) कोच जोड़े गए है, तर्क दिया जा रहा है कि इसमें महिला कोच की अपेक्षा अधिक सीटें है, जिसका लाभ महिला व पुरुष दोनों यात्रियों को मिल रहा है। ट्रेनों से महिलाओं के कोच कब तक के लिए हटाए गए है, इस पर रेल अधिकारियों का भी गोलमोल जवाब है। जबकि महिलाएं इन लंबी दूरी की ट्रेनों में अपने लिए आरक्षित कोच ही तलाशती रहती है। इस चक्कर में या तो उनकी ट्रेन ही छूट जाती है या फिर उन्हें सामान्य वर्ग के कोच में सफर करना पड़ता है।
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वैसे तो झांसी-कानपुर रूट से अप डाउन में साठ से अधिक यात्री और मालगाड़ियों का संचालन रोजाना होता है, लेकिन इस रूट की करीब नौ ट्रेनों (अप डाउन) में नए एलएचबी कोच (लिंक हाफमैन बुश) लगाए गए हैं, मगर इन ट्रेनों से महिला कोच हटा दिए गए हैं। अब आरक्षित कोच के साथ सीधा सामान्य कोच और उसके बाद गार्ड का डिब्बा आ जाता है। उरई स्टेशन पर रोजाना ही महिला यात्री अपने लिए आरक्षित कोच को तलाशती देखी जाती हैं। प्लेटफार्म पर खड़ी ट्रेन में जब कोच नहीं मिलता है तो दौड़कर पूछताछ खिड़की पर जाती हैं और जब तक उन्हें पूरा मामला पता चलता है तब तक उनकी गाड़ी सीटी बजा देती है। ऐसे में सिवाय रेलवे प्रशासन को कोसने के अलावा महिला यात्रियों के पास कोई रास्ता नहीं बचता है। स्टेशन के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार करीब 6-7 माह से प्रमुख ट्रेनों में महिला कोच लगकर नहीं आ रहे हैं।
इन ट्रेनों से हटाए गए महिला कोच
मुंबई से चलकर गोरखपुर जाने वाली कुशीनगर एक्सप्रेस (11015-16), गोरखपुर से यशवंतपुर जाने वाली यशवंतपुर एक्सप्रेस (15023-24) मुंबई से गोरखपुर जाने वाली साप्ताहिक एक्सप्रेस (11079-80), प्रतापगढ़ से मुंबई जाने वाली उद्योग नगरी एक्सप्रेस (12173-74), मुंबई से लखनऊ सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12107-08), गोरखपुर से लोकमान्य तिलक संत कबीरनगर एक्सप्रेस (12541-42), सुल्तानपुर से मुंबई सुल्तानपुर एक्सप्रेस (12143-44), गोरखपुर से यशवंतपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस (15015-16), इंदौर से गोवाहाटी कामाख्या एक्सप्रेस (19305-06) से महिला कोच हटाए गए हैं।
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क्या है एलएचबी कोच
रेलवे लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) कोच बना रही है, पुराने इंट्रीगल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) डिजाइन कोच की तुलना में इनका वजन हल्का है। इसकी लंबाई चौड़ाई भी आईसीएफ कोच की तुलना में ज्यादा है। रेलवे के लिहाज से यह सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। रेल अधिकारियों का कहना है कि महिला कोच में 72 महिला-यात्री सफर कर सकती हैं, जबकि एलएचबी कोच में यह संख्या 80 के करीब पहुंच जाती है, जिसमें महिला व पुरुष दोनों यात्री शामिल होते हैं।
नहीं मिल रहा संतोषजनक जवाब
कानपुर की झकरकटी निवासी कल्पना का कहना है कि रेलवे एक तरफ महिलाओं को बढ़ावा देने की बात कर रही है वहीं दूसरी ओर ट्रेन से महिला कोच गायब है। स्टेशन के अधिकारी भी सही जवाब नहीं दे रहे है। जल्द ट्रेनों में महिला आरक्षित कोच लगाए जाएं।
जनरल कोच में यात्रा करने को मजबूर
पुखरायां की ज्योति ने बताया कि वह दैनिक यात्री है, अक्सर घर जाते समय रात हो जाती है, ऐसे में पुरुषों के साथ यात्रा करनी पड़ती है। इसके चलते असुरक्षा की भावना भी आ जाती है। रेलवे को इस दिशा में जल्द कदम उठाते हुए सभी ट्रेनों में महिला कोच लगाने चाहिए।
डीआरएम का रहा गोलमोल जवाब
झांसी मंडल के डीआरएम संदीप माथुर का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं था। निर्णय रेलवे बोर्ड का ही रहा होगा। महिला यात्रियों को होने दिक्कतों से बोर्ड को अवगत कराया जाएगा। सभी ट्रेनों में महिला कोच लगवाना सुनिश्चित कराया जाएगा।
जल्द वापस लगेंगे महिला कोच
उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज के सीपीआरओ अजीत कुमार सिंह का कहना है कि ट्रेनों में एलएचबी कोच लगाए जाने के चलते ऐसा हुआ है। नए कोच बनाए जा रहे हैं, उनमें महिला कोच की भी व्यवस्था है। जल्द ही सभी ट्रेनों में दोबारा महिला कोच लगवाए जाएंगे।

ज्योति सोनी- फोटो : ORAI

उरई स्टेशन पर बिना महिला कोच के खड़ी बम्बई गोरखपुर एक्सप्रेस- फोटो : ORAI

डीआरएम संदीप माथुर- फोटो : ORAI

सीपीआरओ अजीत कुमार- फोटो : ORAI

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