उरई। मंडलायुक्त डॉ. अजय शंकर पांडेय का मानना है कि बुंदेलखंड में पेयजल की समस्या को देखते हुए जल के सदुपयोग को एक कार्य संस्कृति, बुंदेली संस्कृति का हिस्सा बनाना होगा। साथ ही हमें दिन प्रतिदिन इस बात के लिये सतर्क रहना होगा कि जल की एक बूंद भी बर्बाद न हो। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि राजकीय कार्यालयों में रखी पानी की टंकियों से पानी ओवरफ्लो होकर बहता रहता है, उचित नहीं है।
सभी विभागाध्यक्षों को निर्देशित करते हुए उन्होंने कहा कि सभी टोटी व्यवस्थित है या नहीं। छोटी मोटी खराबी को तत्काल ठीक करें। केयर टेकर को भी हिदायत दी जाए। उन्होंने डीएम प्रियंका निरंजन से कहा कि सभी विभागाध्यक्षों से पानी की बर्बादी के बचाव के लिए हर पंद्रह दिन में प्रमाणपत्र भी लिया जाए। साथ ही जिले स्तर पर एक सचल दल गठित कर समय-समय पर कायार्लयों का निरीक्षण भी कराया जाएं। यदि किसी प्रकार पानी के दुरुपयोग या शिथिलता प्राप्त हो तो कायार्लयाध्यक्षों पर अर्थदंड आरोपित किया जाए। उन्होंने जल संस्थान के महाप्रबंधक को एक एडवाइजरी भी जारी करने के निर्देश दिए।