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Jalaun News: एक महीने से आठ हजार की आबादी पर पानी का संकट

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उरई। कई बार शिकायतों के बावजूद कांशीराम कॉलोनी के लोग पानी के लिए तरस रहे है। यहां आठ हजार की आबादी को टैंकर से जलापूर्ति की जा रही है। एक दिन छोड़ कर पानी आपूर्ति करने वाले टैंकरों से इलाके के लोगों को प्यास बुझाना मुश्किल हो रहा है।
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शहर से दो किलोमीटर दूर स्थित कांशीराम कॉलोनी में करीब आठ हजार की आबादी रहती है। इस आबादी को पानी की सप्लाई जल संस्थान के जरिए एक टंकी व दो नलकूपों के सहारे की जाती थी। पाठकपुरा में स्थापित एक नलकूप तीन साल पहले खराब हो गया था। जिसकी वजह से पानी की टंकी को भरना बंद कर दिया गया। बीते तीन सालों से एक नलकूप से सप्लाई दी जा रही है। जो इतनी बड़ी आबादी के लिए नाकाफी साबित हो रहा है। बीते एक महीने से इस आबादी के लिए पानी का बड़ा संकट खड़ा हुआ है। क्योंकि नलकूप को बिजली की सप्लाई ग्रामीण फीडर से की जा रही है। ग्रामीण फीडर में 24 घंटे में पांच से छह घंटे लाइट आ रही है। इस लिए नलकूप भी पानी की सप्लाई नहीं दे पा रहा है। एक महीने से पानी के संकट से जूझ रही आबादी के टैंकर से सप्लाई दी जा रही है। तीन से चार टैंकर वह भी एक दिन छोड़कर दूसरे दिन आ रहे हैं। जिससे पानी के लिए लोगों को काफी परेशानी हो रही है।यहां टैंकर आने पर पानी के लिए भीड दौड़ रही है। कई बार शिकायत करने के बाद भी लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
पिछली साल कर चुके हैं धरना प्रदर्शन
गर्मी के मौसम में पिछली साल भी कांशीराम कॉलोनी के बाशिंदों को पानी की समस्या से जूझना पड़ा था। जब प्रशासन ने सुनवाई नहीं की तो उन्होंने सड़क जाम करके धरना-प्रदर्शन किया था। उसके बाद भी समाधान नहीं हुआ था तो फिर से प्रदर्शन किया गया था। जिसके बाद जल संस्थान ने पानी के संकट से निजात के लिए टैंकरों की संख्या बढ़ाई थी।पिछले साल करीब आठ टैंकर इस आबादी की प्यास बुझा रहे थे।
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छोटी कॉलोनी के लोगों को होती अधिक समस्या
कांशीराम में छोटी और बड़ी कॉलोनी की आबादी करीब आठ हजार है। वहीं छोटी कॉलोनी बड़ी कॉलोनी से करीब 200 मीटर दूर बनी हुई है। नलकूप की लाइन पहले बड़ी कॉलोनी में पड़ी है। उसके बाद छोटी कॉलोनी में आई है। पानी पहले बड़ी कॉलोनी में आता है। लोग मोटर से पानी भर लेते हैं। जब तक छोटी कॉलोनी में पानी पहुंचता है। तब तक लाइट चली जाती है। इस समस्या से एक महीने से एक हजार की आबादी जूझ रही है। छोटी कॉलोनी में 13 हैंडपंप लगे हुए हैं। इसमें से दो को छोड़कर सभी खराब पड़े हुए हैं।


अमित दुबे ने बताया कि पानी की बड़ी समस्या है। इसकी शिकायत भी कई बार विधायक, सांसद से कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। टैंकर से पानी के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ती है।
फोटो-09 अटलअटल कुशवाहा ने बताया कि हैंडपंप खराब होने से समस्या बढ़ जाती है। टैंकर भी एक दिन छोड़कर आते हैं। जिससे एक दिन पानी के लिए इंतजार करना होता है। तब तक हैंडपंप पर लाइन लगाओ या इंतजार करो।

नलकूप से पानी की सप्लाई ठीक हो जाती थी। लेकिन बिजली नहीं आने से नलकूप भी नहीं चल पा रहा है। टैंकर से सप्लाई की जा रही है। अगर समस्या अधिक आ रही है तो टैंकर की संख्या बढ़ा दी जाएगी।
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श्याम बहादुर, जेई , जल संस्थान
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