कोंच। कस्बे के केलरगंज में बुंदेली संस्कृति एवं लोक कला संवर्धन संस्थान की ओर से परंपरागत रूप से महामूर्ख सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन की शुरुआत में बड़ी संख्या में घोषित किए गए मूर्ख अपने मूर्खाधिराज का स्वागत करने के जुटे। माथे पर डठूला और ठुड्डी पर टिकली अलंकृत कर दूल्हा वेश धारण किए जैसे ही मूर्खाधिराज पधारे, मूर्खों की जमात ने उनका जोरदार स्वागत किया। मूर्खाधिराज का तमगा ऊलजलूल हरकतों के लिए अपनी पहचान कायम कर चुके भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष महेंद्र कुमार सोनी लला को दिया गया।
इस बार का सम्मेलन वरिष्ठ रंगकर्मी स्वर्गीय ज्वालाप्रसाद दीक्षित व स्वर्गीय रामबाबू अग्रवाल को समर्पित रहा। पिछले पांच दशक से अनवरत जारी महामूर्ख सम्मेलन में मूर्खाधिराज के साथ कृपाशंकर द्विवेदी, भाजपा नगर अध्यक्ष सुनील लोहिया, सुनील शर्मा, ओमप्रकाश कुशवाहा, डॉ. पीडी चंदेरिया, अनिल कपूर, किन्नर गुरु सलमा, सरोजबाई आदि के गले में गजरे डालकर उनका स्वागत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राधा-कृष्ण की झांकी की आरती उतारकर की गई। संचालन श्रवण सविता ने किया।
मूर्खाधिराज ने इस परंपरा को कोंच की विरासत बताते हुए कहा कि होली ही नहीं, अन्य पर्वों पर भी लोगों को आपसी वैमनस्यता त्याग कर एक-दूसरे की मदद करते हुए प्रसन्नतापूर्वक अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए। अपने अंदर की बुराइयों को जलाकर एक नए युग का सूत्रपात करने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ रहना चाहिए। इस दौरान हुए नाटक में अतुल शर्मा, अभिषेक रिछारिया, सुशील दूरवार, हिमांशु राठौर आदि ने विभिन्न किरदार निभाए। शिक्षक कमलेश निरंजन, कवि मोहनदास नगाइच, भास्कर सिंह माणिक्य, संजय सिंघल ने व्यंग्य गीत सुनाए। इस दौरान किशोर यादव, अनुरुद्ध मिश्रा, विशाल गिरवासिया, कन्हैया नीखर, हरिश्चंद्र तिवारी, रवि दीक्षित, धर्मेंद्र राठौर, ब्रजेंद्र कुशवाहा, सागर अग्निहोत्री, हर्षित दुबे आदि रहे।
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फोटो-15-कपड़ा फाड़ होली खेलते मूर्खाधिराज के बराती। संवाद
फोटो-18-गुलाल से होली खेलते युवक। संवाद
मूर्खाधिराज के बरातियों ने खेली कपड़ा फाड़ होली
कोंच। मूर्खाधिराज की मित्रमंडली के सैकड़ों युवा बराती बने थे। लवली चौराहे से ढोल नगाड़े के साथ बग्घी में सवार हुए महेंद्र सोनी की बरात नई स्टेट बैंक, चंदकुआं चौराहा, चौकी तिराहा से रामगंज होकर महामूर्ख सम्मेलन स्थल केलरगंज पहुंची। इसमें शामिल युवा इतना हुरियाए कि एक दूसरे के कपड़े तक फाड़ डाले। ऐसा पहली बार हुआ जब पूरी बरात अर्द्धनग्न होकर कार्यक्रम स्थल पहुंच सकी।