आटा। कानपुर-झांसी नेशनल हाईवे-27 पर हर 20 कदम पर गड्ढे हैं। गोविंदम होटल से लेकर कालपी तक करीब 25 किलोमीटर का यह गड्ढे से भरा सफर कमर तोड़ या फिर जख्म देने के लिए काफी है। हाईवे की यह स्थिति तब है जब यहां रोजाना 30 लाख रुपये की टोल वसूली होती है।
आटा टोल प्लाजा से रोजाना सात से आठ हजार वाहन गुजरते हैं। कार चालकों से 110 रुपये और भारी वाहनों से 400 से 665 रुपये तक टोल वसूला जाता है। इस हिसाब से प्रतिदिन 25 से 30 लाख रुपये टोल के रूप में जमा होता है। महीने में यह आंकड़ा करोड़ों तक पहुंच जाता है। बावजूद इसके, वाहन चालकों को सुरक्षित और गड्ढामुक्त सड़क नहीं मिल पा रही। हालत यह है कि कई जगहों पर तो सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है।
वाहन चालकों का कहना है कि थोड़ी सी चूक पर हादसा तय है। आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग स्थिति को नजरअंदाज किए हुए हैं। चार महीने पहले ही एनएचएआई ने इस हाईवे को गड्ढामुक्त घोषित किया था। इसके लिए आठ करोड़ रुपये का टेंडर डेल्टा इलेक्ट्रा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया गया था। वहीं, पैचवर्क कुछ ही माह में जवाब दे गया और सड़क फिर से गड्ढों में तब्दील हो गई। सबसे ज्यादा खराब हालत चमारी पुल, आटा टोल प्लाजा, उकासा मोड़ और उसरगांव के पास देखी जा रही है। यहां गहरे गड्ढों के साथ सड़क की परत तक उखड़ गई है। भारी वाहनों के लिए तो यह मार्ग और भी खतरनाक बन गया है।
जहां पर होती वसूली, वहीं टूटी पड़ी सड़क
आटा टोल प्लाजा की लेन नंबर 1, 2 और 3 के सामने गहरे गड्ढे बने हुए हैं। इन गड्ढों में ईंटें डालकर कोरम पूरा किया गया है। वाहन चालकों का कहना है कि जब टोलकर्मी अपने सामने की सड़क नहीं दुरुस्त करा पा रहे, तो बाकी हिस्सों की मरम्मत की उम्मीद करना बेमानी है।
गड्ढों में ईंट भरकर पूरा किया कोरम
हाईवे के उकासा और चमारी मोड़ के पास बने गहरे गड्ढों को भरने के लिए एनएचएआई के कर्मचारियों ने इंटरलॉकिंग उपयोग आने वाली ईंटें डाल दीं। यह देखकर साफ जाहिर होता है कि मरम्मत केवल औपचारिकता निभाने तक सीमित रह गई है। हाईवे की जर्जर हालत को लेकर वाहन चालक, आटा निवासी अनिल, प्रतीक तिवारी, पिपरायां के विष्णुदत्त द्विवेदी, गौरव सिंह राजावत, संदी के संजय पटेल समेत बड़ी संख्या में लोग बेहद नाराज हैं। उनका कहना है कि टोल के नाम पर मोटी रकम देने के बाद भी उन्हें टूटी-फूटी सड़क मिल रही है। यदि जल्द ही मरम्मत का ठोस समाधान नहीं किया गया तो बड़े हादसे किसी भी दिन हो सकते हैं।
हर समय हादसे का खतरा
आटा के प्रतीक तिवारी बाइक से रोजाना उरई आते-जाते हैं। सड़क पर गड्ढे होने से बाइक चलाना जोखिम भरा रहता है। कहीं-कहीं तो गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, बाइक का पहिया गड्ढे में जाते ही संतुलन बिगड़ जाता है। हर समय हादसे होने का भय बना रहता है। जल्द ही सड़क की मरम्मत कराई जाए।
आटा के अनिल कुशवाहा ने बताया कि हमारा आए दिन कार से उरई या उससे आगे आना-जाना होता है, आटा से लेकर गोविंदम होटल तक सड़क पूरी तरह ध्वस्त पड़ी है। टोल फीस चुकाने के बाद भी गड्ढे वाली सड़क पर चलना पड़ रहा है। ऐसा लगता है कि यह सड़क हाइवे की नही है। सड़क की हालत खराब है, डर भी लगा रहता है कि कार का संतुलन बिगड़ा तो कोई हादसा न हो जाए।
बारिश की वजह से हाईवे की मरम्मत का कार्य नहीं हो पा रहा था। कुछ ही दिनों में काम शुरू करवा दिया जाएगा। वाहन चालकों को किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी।
- तरवीन शेरावत, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
फोटो - 02 हाईवे स्थित आटा बीएमटी इंटर कॉलेज के पास उखड़ा हाईवे। संवाद
फोटो - 02 हाईवे स्थित आटा बीएमटी इंटर कॉलेज के पास उखड़ा हाईवे। संवाद
फोटो - 02 हाईवे स्थित आटा बीएमटी इंटर कॉलेज के पास उखड़ा हाईवे। संवाद
फोटो - 02 हाईवे स्थित आटा बीएमटी इंटर कॉलेज के पास उखड़ा हाईवे। संवाद