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लोगों को लुभा रहे जागेश्वर धाम के नुकीले पत्थर

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महंत धर्म सिंह - फोटो : ORAI
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एट (जालौन)। एट एवं कोटरा क्षेत्र के बीच बेतवा नदी पर बना प्राचीन शिव मंदिर जागेश्वर धाम तेजी से विकसित हो रहा है। पत्थरों के पहाड़ों के बीच स्थित मंदिर को देखने के लिए दूर दराज से लोग पहुंच रहे हैं। मंदिर के महंत धर्मसिंह ने बताया कि मंदिर के पास ही एक दरगाह भी है, जिस कारण स्थान हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक भी है। इसके अलावा वन विभाग की ओर से यहां करीब पांच लाख पौधे भी लगाए जा रहे हैं। जिसमें फूल व फलों के भी वृक्ष शामिल हैं।
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जालौन-झांसी सीमा के बीच कानपुर-झांसी हाईवे से करीब सात किलोमीटर दूर बेतवा नदी किनारे सला गांव के पास स्थित जागेश्वर धाम के पास बहने वाली बेतवा नदी और उसका पथरौल घाट लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हैं, यहां के चमकीले एवं चिकने पत्थर लुभावने लगते हैं। नदी की धाराएं जब पत्थरों से टकराती है तो नजारा देखते ही बनता है। यही नजदीक ही डीकांचल पर्वत स्थित है। कहा जाता है कि हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को इसी पर्वत से नीचे फेंका था। इसके कुछ निशान आज भी यहां दिखाई देते हैं। महंत ने बताया कि मंदिर परिसर के बगल में गरीब कन्याओं के विवाह के लिए गेस्ट हाउस का निर्माण कराया गया है। विवाह पंचमी पर जागेश्वर धाम पर मेला लगता है। उस दिन यहां पर भगवान राम एवं माता सीता का विवाह संपन्न कराया जाता है। विवाह एवं मेले में शामिल होने के लिए बुंदेलखंड के कोने-कोने से लोग आते हैं और बेतवा नदी किनारे जागेश्वर धाम में शंकर भगवान के दर्शन एवं भव्य नजारा देखकर लोग आश्चर्यचकित रहते हैं।
पांच करोड़ की लागत से बन रही सड़क
सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा का कहना है कि जागेश्वर धाम को पर्यटन का केंद्र बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है, हाल में पांच करोड़ की सड़क भी मंदिर के लिए स्वीकृत की गई है। झांसी-कानपुर हाईवे के बगल से निकली पिरौना नहर से लेकर जागेश्वर धाम तक करीब 7 किलोमीटर की सड़क का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। वहीं बुंदेलखंड विकास बोर्ड के सदस्य पवन बादल का कहना है कि शासन को प्रस्ताव भेजकर जागेश्वर धाम को पर्यटन स्थलों में शामिल कराया जाएगा।
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हिंदू मुस्लिम एकता के साथ करते हैं जियारत
एट जागेश्वर धाम के नाम से प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के पास ही मुकर्रम बाबा की दरगाह नदी में बनी है। यहां हिंदू मुस्लिम दोनों ही चादर चढ़ाकर मन्नत मांगते हैं। दरगाह जागेश्वर धाम से करीब 200 मीटर प्राचीन किले के पास बनी हुई है। वहीं वन क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र सिंह ने बताया कि वन विभाग की खाली पड़ी करीब 20 बीघा में नर्सरी तैयार की जा रही है। जिसमें आम, अमरूद, नींबू, करौंदा, पपीता, नीम, शीशम, कंजी, गुलमोहर आदि की नर्सरी तैयार की जा रही है। इससे धाम के आसपास की खूबसूरती और भी बढ़ेगी।

विधायक गौरी शंकर- फोटो : ORAI

साला घाट स्थित जागेश्वर धाम का मनोरम दृश्य- फोटो : ORAI

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