पत्रकारों से बात करते बुंदेलखंड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष राजा बुंदेला
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कोंच। बुंदेलखंड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला ने कहा कि बिना मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड के बुंदेलखंड राज्य का कोई औचित्य नहीं है। हम समग्र बुंदेलखंड राज्य की लड़ाई लड़ रहे हैं, क्योंकि बिना अलग राज्य बने पिछड़े बुंदेलखंड का विकास संभव नहीं है। ये बातें उन्होंने कोंच प्रवास के दौरान मीडिया के सवालों के जवाब में कही।
पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था कि सरकार उत्तरप्रदेश को तीन राज्यों पश्चिमांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। प्रयागराज को बुंदेलखंड की राजधानी बनाकर फतेहपुर, कौशांबी, कानपुर देहात, प्रतापगढ़ जैसे इलाके इसमें समायोजित किए जाएंगे। इस पर राजा बुंदेला ने सफाई दी कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, ये सोशल मीडिया का शिगूफा है।
वह बताए जा रहे बुंदेलखंड से पूरी तरह असहमत हैं क्योंकि प्रतापगढ़, फतेहपुर, कौशांबी प्रयागराज या कानपुर जैसे इलाकों का बुंदेलखंड से कोई लेनादेना नहीं है। दमोह से दतिया होकर चित्रकूट तक है हमारा बुंदेलखंड जो उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में विस्तार पा रहा है। हम समग्र बुंदेलखंड की ही लड़ाई लड़ रहे हैं। एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब छत्रसाल वाला बुंदेलखंड बनकर रहेगा।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंडियों को सभी सरकारों में ठगा गया है। जिस बुंदेलखंड में सात नदियां हों, फिर भी वह प्यासा है। हजारों करोड़ का राजस्व केंद्र और प्रदेश सरकारों को देने वाले बुंदेलखंड के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। इस दौरान डॉ. मो. नईम, संजय सिंघाल, प्रतीक महंत, दशरथ पटेल, जितेंद्र पांडे, अंकुल राठौर भी मौजूद रहे।