उरई। कोतवाली पुलिस की ओर से लोकेशन माफियाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद जिले में फैले इस संगठित नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह ढाबों, पेट्रोल पंपों और प्रमुख चौराहों पर बैठकर अधिकारियों की हर गतिविधि पर नजर रखता है और ओवरलोड वाहनों व माफियाओं को रियल टाइम लोकेशन उपलब्ध कराता है।
गौरतलब है कि बुधवार को कोतवाली पुलिस ने बीडीसी सदस्य मयंक यादव, सुरेंद्र, विशाल व शिवम समेत चार लोगों को राठ रोड के पास अजनारी रोड से गिरफ्तार किया था। आरोप है कि ये लोग व्हाट्सएप ग्रुप और मोबाइल फोन के जरिए परिवहन विभाग, खनन और पुलिस अधिकारियों की लोकेशन माफियाओं तक पहुंचाते थे, जिससे ओवरलोड वाहन आसानी से जिले की सीमाएं पार कर लेते थे।
सूत्रों के मुताबिक लोकेशन माफिया केवल वाहनों की मूवमेंट ही नहीं, बल्कि अधिकारियों के लंच ब्रेक, कार्यालय से निकलने और गश्त के रूट तक की जानकारी साझा करते थे। बताया जा रहा है कि इस पूरे खेल में कुछ अधिकारियों के निजी लोग या जान-पहचान के लोग भी शामिल रहते हैं, जो अंदर की सूचनाएं बाहर पहुंचाते हैं।
लोगों का कहना है कि जिले के कुसमिलिया, बंधौली मोड़, मुहाना, कदौरा, जोल्हूपुर मोड़, डकोर थाने के पास और राठ रोड स्थित एक होटल के सामने खड़े होकर कारों में बैठे लोग अधिकारियों की लोकेशन देते हैं। कई बार ये लोग सीधे अधिकारियों के निकलने वाले रूट पर तैनात हो जाते हैं और जैसे ही अधिकारी किसी दिशा में निकलते, सूचना तुरंत माफियाओं तक पहुंचा दी जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए, तो इसमें केवल चार लोग ही नहीं बल्कि कई सफेदपोश और रसूखदार चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं। पुलिस की हालिया कार्रवाई के बाद लोकेशन माफियाओं में खलबली मची हुई है और कई संदिग्ध भूमिगत हो गए हैं।