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Jalaun News: साहब...दवा मिल रही न बच्चों के लिए दूध का इंतजाम

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रामकुंड पार्क के पीछे बाढ़ का कहर।  - फोटो : रामकुंड पार्क के पीछे बाढ़ का कहर।
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उरई। साहब... बच्चों के लिए दवा खुद रात में जाकर लानी पड़ी। खाना भी खुद बनाना पड़ा। रात 11 बजे जाकर कहीं खाना नसीब हुआ और सुबह से लेकर अब तक सिर्फ एक चाय मिली। बिस्किट मिले न कोई नाश्ता। अगर प्रशासन इंतजाम नहीं करवा सकता तो कम से कम नाव तो दे, जिससे घर से राशन ला सकें। सुबह 11 बजे के बाद भी खाना नहीं मिला। यह दर्द उन बाढ़ पीड़ितों का है जिन्हें मंगलवार की रात राहत शिविर में लाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी और नेता सिर्फ फोटो खिंचवाकर चले गए, मदद करने कोई नहीं पहुंचा।
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लगातार चार दिन से नाले का पानी उफान पर है। पानी कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहा है, जबकि बारिश रुक-रुककर हो रही है। इसके बावजूद जलस्तर में कोई कमी नहीं आ रही। अब तक करीब एक हजार घर पानी की चपेट में आ चुके हैं, जिनके चारों ओर पानी भरा है। शांति नगर, रामनगर, उमरारखेरा, एसआर स्कूल के बगल और पीछे की बस्ती, रामकुंड से लेकर डढ़वा पुल तक की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। लगभग दस हजार की आबादी इस संकट की चपेट में है।
चार दिन से लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं। स्थानीय लोग घरों में कैद हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधि मदद के नाम पर सिर्फ दिखावा कर रहे हैं। अब तक केवल चुनिंदा लोगों तक ही राहत पहुंची है। शांति नगर में नगर पालिका द्वारा मंगलवार शाम को राहत शिविर बनाया गया। अधिकारियों और नेताओं ने वहां फोटो खिंचवाई, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। शिविर में रुके राजू, संतराम, भूरी, लाली, जूली, मालती, पत्री, उषा ने बताया कि रात 11 बजे खाना मिला, वह भी खुद बनाना पड़ा। सुबह सिर्फ एक चाय मिली। 11 बजे तक नाश्ता और खाना नहीं मिला। बताया कि बच्चों की दवा भी खुद के खर्चे पर लानी पड़ी और दूध तक नहीं मिल रहा।
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असली पीड़ितों को खाना नहीं दिया गया, जबकि आसपास के लोगों को बांटा गया। अधिकारियों से शिकायत पर 11 बजे के बाद खाना बनना शुरू हुआ। शहर के शांति नगर, नया रामनगर, ईदगाह, डढ़वा, तिलकनगर, बैल बाजार अस्थायी सहित कई इलाकों की बिजली आपूर्ति बंद है। कई ट्रांसफार्मर और बिजली के खंभे डूबे हुए हैं।


सिर्फ शांति नगर में बना शिविर
शहर के अंदर लगभग पांच हजार की आबादी बाढ़ से पीड़ित है। घरों में पानी घुस गया है और लोग बाहर नहीं निकल पा रहे। पानी के बढ़ते स्तर के कारण लोग रातभर जाग रहे हैं। ईदगाह, उमरारखेरा, एसआर स्कूल के बगल, रामकुंड के पीछे, नीलबरी, डढ़वा, तिलक नगर जैसे इलाकों में अब तक प्रशासन की कोई मदद नहीं पहुंची। स्थानीय सभासद जितेंद्र याज्ञिक और अशरफ चेन्नई ने बताया कि अब तक उनके मोहल्लों में कोई मदद नहीं दी गई है। ईओ को बताया गया तो उन्होंने सूची बनवाकर भेजने को कहा। लेकिन अब बाढ़ में घुसकर कौन जाए। पानी सात से आठ फीट तक भरा है, ऐसे में नाव की जरूरत है। मगर अब तक ऐसा कोई इंतजाम नहीं किया गया। यदि पानी और बढ़ा तो लोग घर छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे।


पहली मंजिल तक पानी, कई बेघर
बाढ़ पीड़ितों ने पहली मंजिल तक खाली करनी शुरू कर दी है। करीब 100 घरों में पानी अधिक भर गया है। डढ़वा के पास करीब 50 दुकानों में पानी भर चुका है। आगे की दुकानें भी खाली की जा रही हैं। रामकुंड पार्क के पीछे आधे से अधिक मकान डूब चुके हैं। बुधवार दोपहर की बारिश के बाद मुख्य बाजार में भी बाढ़ जैसे हालात बन गए। लगभग 100 दुकानों में पानी भर गया। मोहल्लों की आधा दर्जन गलियां डूब चुकी हैं, इन्हीं रास्तों से लोग आवाजाही कर रहे हैं। बारिश के बाद हालात और भी खराब हो सकते हैं। रामकुंड के पीछे और बैल बाजार में नगर पालिका द्वारा बनाए गए एसआरएफ सेंटर में पानी घुस गया है और उसकी दीवारें डूबने लगी हैं।


कहां से आ रहा इतना पानी
लगातार रपटों और पुलों के ऊपर से पानी बह रहा है। बारिश न होने के बावजूद जलस्तर बढ़ रहा है। नहर विभाग के अधिशासी अभियंता धर्मघोष ने बताया कि शहर का मुख्य नाला पालिका क्षेत्र में आता है, जिसमें छोटे-बड़े कई नाले जुड़े हैं जो आसपास के गांवों से होकर आते हैं। कई दिनों से लगातार बारिश के कारण खेतों का पानी धीरे-धीरे शहर से होकर गुजर रहा है। चूंकि पानी की मात्रा ज्यादा है और नाला छोटा, इसलिए बाढ़ की स्थिति बनी है। यह नाला करीब 40 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास पानी रुक जाता है, वहीं से यह पानी शहर में प्रवेश कर रहा है। यह पानी दो-तीन दिन तक नहीं निकलेगा। यदि बारिश और हुई, तो हालात और भयावह हो सकते हैं। यह नाला सीधे नून नदी में जाकर जुड़ा है।
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