उरई। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने गुरुवार देर रात करीब साढ़े तीन घंटे तक स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत परखी। मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल मिलीं। नाराज डीएम ने चिकित्सालय प्रशासक व आउटसोर्सिंग के नोडल डॉ. चरक सांगवान व कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह को स्वास्थ्य सेवाओं, सफाई, आउटसोर्सिंग कार्यों व चिकित्सकीय दायित्वों के प्रति गंभीरता न बरतने पर प्राचार्य को कार्रवाई के निर्देश दिए।
डीएम ने प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी को निर्देशित किया कि अवकाश से आने के बाद प्रबंधन कार्य में लापरवाही बरतने वाले सभी प्रभारी अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अमर उजाला लगातार मेडिकल कॉलेज की बदहाली पर खबरें प्रकाशित कर रहा है। डीएम सबसे पहले रात करीब दस मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने वार्डों में जाकर मरीज और तीमारदारों से बातचीत की। फिर निरीक्षण की शुरुआत इमरजेंसी कक्ष से हुई। चिकित्सकों से ड्यूटी के दौरान यूनिफॉर्म में रहने नेम प्लेट लगाने व मरीजों के साथ संवादशील बने रहने को कहा।
लेबर वार्ड में भर्ती प्रसूताओं से भोजन और उपचार की जानकारी ली गई। भर्ती 36 प्रसूताओं में से 19 को कन्याओं का जन्म हुआ, जिस पर डीएम ने संबंधित को निर्देशित किया कि एनजीओ एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय कर सभी नवजात बालिकाओं के कन्या सुमंगला योजना के फॉर्म भरवाए जाएं।
निरीक्षण में अस्पताल परिसर में गंदगी, पान मसाला और थूक के निशान मिले। साथ ही शौचालय भी बंद देखे। नाराज डीएम ने सफाई व्यवस्था प्रभारी के खिलाफ कठोर कार्यवाही के निर्देश दिए। परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने व गंदगी फैलाने वालों से जुर्माना वसूलने को कहा।
बाल रोग वार्ड में निरीक्षण के दौरान ड्यूटी पर तैनात पैरा मेडिकल स्टाफ द्वारा मरीजों की समरी, डायग्नोसिस व फाइल रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं किए जा रहे थे। डीएम ने तिथिवार इलाज का ब्योरा दुरुस्त रखने को कहा। वार्ड में भर्ती 10 वर्षीय छात्र पुष्पेंद्र से भी जानकारी ली। ऑर्थो वार्ड में भर्ती रहमान ने डीएम से कहा कि सुनाई नहीं देता।
डीएम ने सीएमओ को निर्देशित किया कि सुबह उनके कान के लिए मशीन लगवा दी जाए। ब्लड बैंक में सभी ग्रुप के ब्लड मिले। सैनिटाइजेशन व्यवस्था न मिलने पर उन्होंने तत्काल सफाई एवं संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि मरीजों को बेहतर इलाज, स्वच्छ वातावरण व निशुल्क दवाएं मिलना शासन और जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। लापरवाही बरतने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।