कोंच।
सिद्घाश्रम में बार-बार राक्षसों द्वारा यज्ञ को भंग करने से आहत महर्षि
विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए अयोध्या नरेश दशरथ से उनके पुत्रों राम
और लक्ष्मण को मांग लाए। रास्ते में जब वे ताड़क वन से गुजर रहे थे, तभी
विश्वामित्र ने ताड़का के पापाचारों से राम को अवगत कराया और उस राक्षसी का
वध करने के निर्देश दिए।
पहले तो राम ने स्त्री का बध करने को क्षत्रिय
धर्म के विपरीत बताया लेकिन गुरू ने जब उन्हें ऊंच नीच समझाते हुए बताया कि
राक्षसी प्रवृत्तियां पुरुष या स्त्री नहीं बल्कि राक्षसी ही होती हैं और
इनके वध में कोई दोष नहीं लगता तो गुरू के आदेश का पालन करते हुए उन्होंने
ताड़का का संहार कर उस जनस्थान को अभय प्रदान किया। बीती रात्रि यह प्रसंग
कोंच की ऐतिहासिक रामलीला में मंचित किया गया।
श्रीधर्मादा रक्षिणी सभा
द्वारा संचालित कोंच के 163वें रामलीला महोत्सव में बीती रात्रि ताड़का वध
लीला का रोमांचक प्रदर्शन किया गया। ताड़का का वध करके राम और लक्ष्मण
गुरू विश्वामित्र के साथ सिद्घाश्रम पहुंचते हैं। इसके बाद प्रारंभ हुआ
विश्वामित्र का यज्ञ।
यज्ञ की सुगंध पाकर राक्षस फिर वहां आकर उत्पात मचाने
और यज्ञ ध्वंस करने का प्रयास करते हैं लेकिन राम सुबाहु का बध कर देते
हैं और बिना फण वाला वाण चला कर मारीच को सौ योजन दूर फेंक देते हैं। इस
लीला को देखने के लिए हजारों की संख्या में जनसैलाब उमड़ा विश्वामित्र का
किरदार रंगकर्मी गोविंदशरण मिश्रा, दशरथ का रामकिशोर पुरोहित, सुमंत्र का
राजेन्द्र भारद्वाज, बशिष्ठ का संतोष त्रिपाठी, कल्लू नाई आदि के अभिनय
काफी सशक्त रहे। रामलीला समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र गुप्ता, मंत्री सतीश
राठौर, नरोत्तम स्वर्णकार मृदंल दांतरे आदि मंचन में सहयोग कर रहे थे।