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देरी के कारण दोहरीकरण का समय के साथ लागत भी बढ़ी

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उरई रेलवे स्टेशन के यार्ड में गुड्स शेड में काम करती जेसीबी। - फोटो : ORAI
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उरई। झांसी कानपुर रेलवे ट्रैक दोहरीकरण का काम वर्ष 2014 में शुरु हुआ था। इसे 2018 तक पूरा किया जाना था लेकिन अब तक 206 किलोमीटर में सिर्फ 87 किलोमीटर का ही काम पूरा हुआ है।
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अब इसे वर्ष 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। देरी से चल रहे काम के चलते काम की लागत भी बढ़ गई है। छह साल में कुल 87 किलोमीटर ही ट्रैक का काम पूरा हुआ है।
झांसी कानपुर रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण तीन चरणों में कराने की योजना बनाई गई थी। जिसमें पहले चरण में झांसी से नंदखास, दूसरे चरण में एरच रोड से उसरगांव और तीसरे चरण में उसगांव से भीमसेन स्टेशन तक कुल मिला कर 206 किमी ट्रैक पड़ना था।
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इसमें झांसी से एरच रोड तक का काम करीब 90 फीसदी पूरा हो चुका है। इसी तरह एरच रोड से उसरगांव तक के काम का भी 90 फीसदी पूरा हो चुका है। वहीं उसरगांव से भीमसेन के बीच अभी सिर्फ 40 फीसदी काम ही पूरा हुआ है।
इसका कारण ये है कि उसरगांव से भीमसेन के बीच जिस एसईडब्लू कंपनी को काम करना था, वह काम अधूरा छोड़कर चली गई। इसके बाद अब रेल विकास निगम लिमिटेड को यह काम कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
शुरूआत में जब काम शुरू हुआ था तब इस प्रोजेक्ट की लागत 1100 करोड़ थी। लेकिन लगातार हो रही देरी के कारण इसकी लागत में इजाफा होता गया। वर्तमान में इसकी लागत बढ़कर 2182 करोड़ हो गई है। आरवीएनएल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रियांक गुप्ता का कहना है कि दिसंबर 2021 तक काम पूरा करने का लक्ष्य है।
झांसी कानपुर दोहरीकरण का काम एक नजर में
कुल लंबाई 206 किलोमीटर
कुल स्टेशन 26
बड़े पुल - 8
छोटी पुलिया - 203
कार्य प्रारंभ की तिथि 15 दिसंबर 2014
काम पूरा होने की तिथि - नवंबर 2019
पहला चरण - झांसी से एरच रोड (67 किलोमीटर)
दूसरा चरण - एरच रोड से उसरगांव (70 किलोमीटर)
तीसरा चरण - उसरगांव से भीमसेन (69 किलोमीटर)
अभी तक काम की स्थिति
झांसी से पारीछा तक (24 किलोमीटर), पारीछा से नंदखास (19 किलोमीटर) पिरौना, एट, भुआ (27 किलोमीटर), सरसौखी से उसरगांव (17 किलोमीट) का काम पूरा हो चुका है। अब नंदखास से पिरौना कुल 32 किलोमीटर और भुआ से सरसौखी (18 किलोमीटर) का काम भी लगभग पूरा है। इस सेक्शन में इसी महीने रेल संरक्षा आयुक्त से निरीक्षण कराने की तैयारी है।
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