उरई/कुठौंद (जालौन)। अपनी मौत से चंद समय पहले होटल संचालक सुबोध ने शायद यह सोचकर सुसाइड नोट और जिस्म पर सूदखोरों के नाम लिखे होंगे कि पुलिस उन्हें उनकी करनी का फल देगी, उसे क्या मालूम रहा होगा कि पुलिस जांच के नाम पर आरोपियों के बचाव में ही खड़ी नजर आएगी। परिजन सूदखोरों का नाम चिल्लाते रहे लेकिन कुठौंद पुलिस के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। सुसाइड नोट में कुछ नामों के साथ साफ लिखा है कि मेरी मौत के जिम्मेदार यह लोग है लेकिन थाना पुलिस की आंख नहीं खुली। थाना प्रभारी सुधाकर मिश्रा का कहना है कि जिस्म और सुसाइड नोट पर किसके नाम और क्यों लिखे हैं, वे कैसे होटल संचालक की मौत के जिम्मेदार हैं, इनकी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सोमवार की शाम तक जिसने भी सुबोध को अपने होटल में बैठकर काम करते देखा, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह आज इस दुनिया में ही नहीं है। बंद होटल के आगे पूरे दिन भीड़ लगी रही और लोग तरह तरह की चर्चाएं करती रही। सुबोध के जिस्म और सुसाइड नोट पर जिनके भी नाम लिखे हैं, उन्हें सभी अच्छी तरह जानते हैं लेकिन कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। सूत्रों की मानें तो जिन आधा दर्जन से अधिक लोगों को सुबोध ने अपनी मौत जिम्मेदार ठहराया है, उनमें ज्यादातर क्षेत्र के प्रभावशाली लोग ही है, जिस कारण पुलिस भी मामले में कोई लिखा पढ़ी करने में जांच की दुहाई दे रही है।
ब्याज में बिक गए सुबोध के दो ट्रैक्टर
होटल के कर्मियों का कहना है कि कुछ समय पहले तक सुबोध के पास चार ट्रैक्टर हुआ करते थे, इस वक्त दो ही बचे हैं। सूदखोर अक्सर देर रात तक होटल में डटे रहते थे और ब्याज की वसूली कर ही जाते थे। जिस कारण ही सुबोध को अपने ट्रैक्टर तक बेचने पड़े। उस पर बरसात के कारण मौरंग के ट्रक न चलने से होटल का कामकाज भी प्रभावित रहा।
पांच से दस फीसदी तक चलता है ब्याज
इलाकाई लोगों की मानें तो क्षेत्र में ऐसे कई प्रभावशाली लोग हैं, जो कि बिना लाइसेंस ब्याज पर रुपये देने का काम करते हैं। ऐसे लोगों की थाना चौकी में भी अच्छी सेटिंग है। यही कारण है कि सूदखोर पांच से दस फीसदी ब्याज पर भारी भरकम रकम बांटते हैं। कर्ज लेने वाला सिर्फ ब्याज देते देते ही परेशान रहता है।
बेसहारा हुई पत्नी और दोनों बेटियां
सुबोध के परिवार में पत्नी सुनीता के अलावा दो बेटियां दीक्षा (18) राधिका(9) हैं। पत्नी ने आधा दर्जन ब्याज वसूलने वालों के दबाव में आत्महत्या करने का आरोप लगाया है। पत्नी का कहना है कि पति की मौत के बाद अब कैसे बच्चियों को लेकर जीवन यापन करेगी, कौन होटल की देखरेख करेगा। उनका तो सहारा ही छिन गया।