उरई। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने के लिए केंद्र और राज्य की ओर से तमाम योजनाएं संचालित हैं। इसके बावजूद जिला अस्पताल में इलाज करवाने में हजारों रुपये खर्च करने पड रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को मुफ्त अल्ट्रासाउंड कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। वहीं, अगर उन्हें कोई गंभीर बीमारी है तो उन्हें तुरंत बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। इसका फायदा उठाकर डॉक्टर भी मरीजों का अल्ट्रासाउंड चुनिंदा प्राइवेट सेंटरों से करवाते है।
जिला महिला अस्पताल में प्रवेश करते समय गर्भवती महिलाएं अपने हाथ में जांच रिपोर्ट के थैले के साथ दिखाई देती हैं। इनमें लगभग सभी थैले प्राइवेट अल्ट्रासाउंड व पैथोलॉजी के दिखाई देते हैं। इन महिलाओं के पास सिर्फ एक रुपये का सरकारी पर्चा होता है। बाकी सभी जांच और दवा प्राइवेट पैथोलॉजी सेंटरों की होती हैं। जबकि सरकारी सुविधाओं में ये सभी निशुल्क है। इसके बाद भी डॉक्टर मरीजों को प्राइवेट संस्थानों से जांच और दवाओं के लिए जोर देते हैं।
जिला अस्पताल में कई महिलाएं चार से पांच महीने से इलाज करवा रही हैं। उन्हें इस बात की जानकारी तक नहीं है कि सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड से लेकर पैथोलॉजी जांचें सभी फ्री है। कमीशन के लालच में डॉक्टर भी अल्ट्रासाउंड और दवाएं बाहर की लिख देते हैं। सभी मरीजों को पहले ही बता देते हैं कि उन्हें किस सेंटर और स्टोर पर जाना है। अगर मरीज दूसरी जगह से दवा या अल्ट्रासाउंड करवाता है, तो उसे फिर से परेशान किया जा रहा है। मरीजों ने बताया कि डॉक्टर ही प्राइवेट अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं। अगर सरकारी के लिए लिखते हैं तो मरीजों को चार से पांच दिन तक इंतजार करना पड़ता है। तब जाकर उनका इलाज शुरू हो पाता है।
मरीजों की सुनें
प्रशांत ने बताया कि अपनी पत्नी कल्पना को दिखाने के लिए शुक्रवार से परेशान हो रहे हैं। तीन दिन बाद भी अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया है। मजबूरन प्राइवेट पैथोलॉजी से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। अस्पताल में एक दिन में सिर्फ 35 अल्ट्रासाउंड ही किए जाते हैं। इसके बाद अगर नंबर नहीं लग पाया तो बाहर से अल्ट्रासाउंड करवाना मजबूरी हो जाती है। नीलम ने बताया कि उनको जानकारी नहीं है। सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड होता है। डॉक्टर साहब ने तो उन्हें प्राइवेट पैथोलॉजी से अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा था। वहीं से अल्ट्रासाउंड करवाकर ले आई हैं। सुशील ने बताया कि अपनी पत्नी दामिनी को दिखाने के लिए आए हैं। अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए डॉक्टर साहब ने प्राइवेट के लिए बोला था। उसी में करवा लिया है। बाहर से अल्ट्रासाउंड करवाने में 800 रुपये का खर्च आया है। वहीं, कुछ दवाएं भी लिखी गई थीं, उनमें भी 400 खर्च करने पड़े हैं। रुबी ने बताया कि एक महीने पहले भी उन्हें प्राइवेट में अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा गया था। फिर से प्राइवेट के लिए कहा गया है। दवाएं भी बाहर की लिख कर दी गई हैं। मेरे पास इतने रुपये भी नहीं है कि इलाज करवा सकें। बाहर की दवा हजारों में आ रही है।
वर्जन
बाहर से अल्ट्रासाउंड करवाना सख्ती के साथ मना है और सभी डॉक्टरों को यह हिदायत भी दी जा चुकी है। इस संदर्भ में अगर कोई शिकायत संज्ञान में आती है तो कार्रवाई की जाएगी।साथ ही महिला अस्पताल में अभी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। महिला अस्पताल के लिए रेडियोलॉजिस्ट की मांग की गई है। -डॉ सुनीता बनोधा, सीएमएस महिला अस्पताल