कालपी। हमीरपुर को जोड़ने वाले हमीरपुर-जोल्हूपुर मोड़ के ओवरब्रिज की एक लेन साल भर में ही दम तोड़ने लगी है। सड़क पर गहरे गड्ढे हो चुके हैं। सरिया और एंगल बाहर निकल आए हैं। 40 हजार लोग रोजाना यहां से आवागमन करते हैं। ऐसे यह हालात किसी भी वक्त बड़ा हादसा करा सकते हैं।
दरअसल, सात साल पहले 23 मार्च 2018 को कालपी के हमीरपुर–जोल्हूपुर मोड़ की रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हुआ था। रेलवे और सेतु निगम को यह काम कराने के लिए शासन से 33 करोड़ चार लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। तीन साल में यह काम पूरा होना था। इस पुल का उद्देश्य था कि हमीरपुर, महोबा, जालौन और आसपास के 100 से अधिक गांवों के लोगों को जाम और रेलवे फाटक की परेशानी से मुक्ति मिले।
ओवरब्रिज बनते-बनते सात साल बीत चुके हैं, लेकिन काम आज भी अधूरा है। एक साल पुल की एक लेन को खोल दिया गया था। सात साल से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन ओवरब्रिज का काम आज तक अधूरा है। केवल एक लेन को चालू किया गया और वह भी अब खतरे में है। इस लेन की सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। सरिया बाहर निकल आईं हैं और किनारे लगाए गए एंगल टूट चुके हैं। यह महज एक साल में ही जर्जर हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ओवरब्रिज के निर्माण में गंभीर लापरवाही और घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। कई बार निरीक्षण में भी अधिकारियों ने फटकार लगाई, लेकिन सुधार नहीं हुआ। पुल की दोनों ओर की सड़कें भी पूरी तरह टूटी हुई हैं, जिससे वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को भारी दिक्कत होती है। अब तक पुल पर कई वाहन फिसलकर गिर चुके हैं। कुछ बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन फिर भी संबंधित विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। लोगों का कहना है कि अगर इस पुल को तत्काल दुरुस्त नहीं किया गया, तो यह किसी दिन बड़ा हादसा करा सकता है।
वैकल्पिक मार्ग भी जर्जर
रेलवे लाइन के नीचे से निकलने वाला वैकल्पिक मार्ग पहले से ही खराब है। बरसात में पानी भरने से यह मार्ग पूरी तरह बंद हो जाता है। ऐसे में ओवरब्रिज ही एकमात्र सहारा है, लेकिन उसकी मौजूदा हालत से लोग रोजाना अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। यह पुल न केवल कदौरा, कुरारा और हमीरपुर को जोड़ता है, बल्कि महोबा और जालौन के कई कस्बों के लोगों के लिए भी अहम मार्ग है। रोजान 40 हजार से अधिक लोग इस रास्ते से गुजरते हैं। अगर पुल बंद हुआ तो वैकल्पिक मार्ग पर दूरी और समय दोनों कई गुना बढ़ जाएंगे। इससे आवागमन और आर्थिक गतिविधियों पर सीधा असर पड़ेगा।
वर्जन -
संबंधित अधिकारी से बात की जाएगी। निर्माण कार्य की जांच उच्च अधिकारियों के माध्यम से कराई जाएगी। जल्द से जल्द दोबारा मरम्मत कराई जाएगी।
- मनोज कुमार, एसडीएम
वर्ष 2017- 2018 में पुल पास हुआ था। इसको तीन साल में बन जाना चाहिए था, लेकिन कुछ समय नक्शा पास होने में लगा तो कुछ जमीन के अधिग्रहण करने में। मार्च 2025 तक रेलवे विभाग ने अपना काम पूरा किया। इस वजह से देरी हुई। इस पुल पर सात एक्सटेंशन ज्वाइंट टूट गए हैं। सड़क पर गड्ढे भी हैं। सामान खरीदकर रख लिया गया है। रूट डायवर्जन का इंतजार है। कुछ बजट का भी अभाव है। इन दोनों के होने पर तत्काल काम पूरा कराया जाएगा।
मृगेंद्र सिंह चौहान, परियोजना निदेशक सेतु निगम