उरई (जालौन)। छठ पूजा के दूसरे दिन महिलाओं ने खरना का व्रत रखा। शाम को प्रसाद में गुड़ व गन्ने की खीर बनाई। प्रसाद खीर, रोटी और केला खुद खाया फिर परिवार के पुरुषों, बच्चों व रिश्तेदारों को खिलाया। इसके साथ ही 36 घंटे का छठी मैया का निजर्ला व्रत शुरू हो गया। शनिवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ देकर व्रत का समापन होगा।
घरों में दिन भर छठ मैया के गीत गूंजते रहे। हे माई गंगा के तीरे तोर निखरे ला चेहरा, पूजे ला जग संसार। चल चल सखी हो छठी माई के करे पुजनवा, चल चच सखी हो लेले कशईली पानवा जैसे गीत गाए गए। छठ पूजा समिति के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार सिंह ने बताया कि बिहार और पूर्वांचल के करीब तीन हजार परिवार जिले में हैं। जिनमें कुछ लोग घरों और कुछ आसपास तालाब पोखरों पर पूजा करते हैं।
सबसे बड़ी पूजा रामकुंड स्थित पार्क में होती है। शुक्रवार को चार बजे रामकुंड पार्क में एकत्रित होंगे। यहां डूबते सूर्य को अर्घ दिया जाएगा। जबकि अगली सुबह 21 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ देकर पारण किया जाएगा। मनोरमा तिवारी, कमलेश त्रिपाठी, सुधा झा, आराधना सिंह आदि ने बताया कि छठ पूजा को लेकर उत्साह है।
फोटो-29-संजय साहनी।
पूजा में होगा कोविड नियमों का पालन
छठ पूजा समिति के अध्यक्ष संजय साहनी ने बताया कि छठ पूजा इस बार कोविड के नियमों के तहत मनाई जाएगी। सरकार ने जो गाइडलाइन जारी की है, उसके तहत सोशल डिस्टेसिंग का पालन करना होगा और मास्क लगाकर पूजा के लिए आना होगा। उन्होंने सभी से कोरोना संक्रमण से बचने के लिए नियमों का पालन करने की अपील की।