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खून के रिश्ते ने खूनी बहू को किया माफ

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उरई। सास की हत्या के आरोप में सजा काट रही बहू ने बेटे को जन्म दिया तो अपने वंश को अच्छा जीवन देने के लिए ससुर का दिल पसीज उठा। महिला अस्पताल में बाबा ने जब नवजात को गोद में उठाकर दुलारा तो बस उनकी जुबान से एक ही शब्द निकला, जो भयो वो होनी थी, अपनों के लिए अपने को ही सजा देना ठीक नहीं। बहू को माफ कर अब घर ले जाएंगे। इस बात पर अस्पताल और महिला के साथ जेल से आया स्टाफ भावविभोर हो गया।
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ग्राम डकोर निवासी विशुन पाल की पत्नी रामरती (55) ने खुदकुशी कर ली थी। इस मामले में विशुन ने बहू सरोज (24) और उसके भाई को आरोपी बताकर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में सरोज और उसका भाई जेल में बंद है। जेल जाते समय सरोज गर्भवती थी। बीती 9 जनवरी को सरोज को प्रसव पीड़ा हुई तो जेल अधिकारियों ने एक महिला व एक पुरुष सिपाही को साथ भेजकर महिला अस्पताल में भर्ती कराया। इसकी जानकारी सरोज के पति रामहेत और ससुर विशुन को भी दी। बहू के प्रसव पीड़ा की जानकारी होते ही पति और ससुर अस्पताल पहुंचे। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर एमके वर्मा व स्टाफ नर्सों से कहा कि बहू की सुरक्षित डिलीवरी कराई जाए। 11 जनवरी को शाम 6.40 बजे सरोज ने बेटे को जन्म दिया। अपने खून को देखकर ससुर का हृदय परिवर्तन हो गया और उन्होंने खूनी के रूप में जेल भेजी गई बहू को माफ कर दिया।
ससुर विशुन ने बताया कि सरोज को एक डेढ़ साल का बेटा कल्लू भी है। वह भी बहू के साथ जेल में बंद था। घर में वह और उनका बेटा रामहेत ही रहते थे। वह अब पत्नी रामरती के साथ हुई घटना को होनी बता रहे हैं। उनका कहना है कि जो होना था, वह हो गया। अब वह बहू को माफ करना चाहते हैं। वह पूछ रहे हैं कि यह मामला कैसे खत्म होगा। अब बहू और नाती घर आ जाएं तो सब ठीक हो जाए।
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महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके त्रिपाठी का कहना है कि जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि एक महिला बंदी प्रसव के लिए आई है तो उन्होंने स्टाफ को सख्त हिदायत दी कि मामले में कोई कोताही न बरती जाए। फिलहाल जच्चा-बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। नियमानुसार 48 घंटे तक अस्पताल में रखा जाएगा। सीएमएस ने जानकारी होने पर विशुन के फैसले की सराहाना की।
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