कोंच। गेहूं खरीद केंद्रों पर बारदाने का संकट अभी भी बरकरार है। पिछले 15 से 20 दिनों से केंद्र बंद पड़े होने से किसान परेशान होकर इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। शुक्रवार को खरीद व्यवस्था ठप होने से नाराज किसानों ने मंडी गेट पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया था। अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया था कि अगले दिन तक केंद्रों पर बारदाना पहुंचाकर तुलाई शुरू करा दी जाएगी, लेकिन शनिवार को भी अधिकांश केंद्रों पर स्थिति जस की तस बनी रही।
कोंच में गेहूं खरीद केंद्र पिछले कई दिनों से बारदाने की कमी से जूझ रहे हैं। शुक्रवार को सभी केंद्रों पर खरीद बंद होने से गुस्साए किसानों ने मंडी गेट पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया था। एसडीएम हेमंत पटेल के आश्वासन के बाद किसानों ने जाम खोल दिया था और आरएफसी केंद्र पर तुलाई भी शुरू करा दी गई थी। शनिवार को केवल आरएफसी व बी-पैक्स जुझारपुरा केंद्र पर ही बारदाना पहुंच सका, इसके बाद इन दोनों केंद्रों पर गेहूं की तुलाई शुरू हो गई। जबकि पीसीएफ, क्रय विक्रय और एफसीआई केंद्र अभी भी बारदाने के अभाव में बंद पड़े हैं।
आरएफसी केंद्र प्रभारी मुकेश कुमार ने बताया कि शुक्रवार देर शाम 5,000 बोरी आवंटित हुई थीं, जिसके बाद तुलाई शुरू करा दी गई। वहीं बी-पैक्स जुझारपुरा के केंद्र प्रभारी राजकुमार शर्मा ने बताया कि शुक्रवार रात 2,500 बोरी मिली हैं और शनिवार से केंद्र पर खरीद शुरू हो गई है। हालांकि उन्होंने कहा कि उठान नहीं होने से भंडारण की समस्या खड़ी हो सकती है। एफसीआई केंद्र प्रभारी खुरशेद आलम ने बताया कि बारदाने के अभाव में उनका केंद्र पिछले 20 दिनों से बंद पड़ा है। पीसीएफ केंद्र प्रभारी कमलेश कुमार और क्रय विक्रय केंद्र प्रभारी ऊषा तिवारी ने भी बताया कि अब तक बारदाना नहीं मिल सका है, जिससे खरीद कार्य बंद पड़ा है।
एफसीआई का नामोनिशान तक नहीं मिल रहा
ग्राम चमरुआ निवासी किसान तुलाराम ने बताया कि बारदाने के अभाव में अधिकांश गेहूं खरीद केंद्र बंद पड़े हैं, जो केंद्र खुले भी हैं वहां किसानों की भारी भीड़ है, इससे परेशानी हो रही है। मंडी के नीलामी चबूतरे पर संचालित होने वाला एफसीआई केंद्र तो पूरी तरह गायब हो गया है। किसान इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं, कोई सुनने वाला तक नहीं है।
इस बार केंद्रों की व्यवस्थाएं ठीक नहीं
ग्राम फुलैला निवासी किसान उमेश चंद्र ने कहा कि इस बार गेहूं खरीद केंद्रों पर शुरुआत से ही अव्यवस्थाएं हैं। व्यवस्थाएं ठीक न होने से किसानों की गेहूं बिक्री प्रभावित हो रही है और उन्हें लगातार परेशानी उठानी पड़ रही है। कभी बारदाना खत्म होने से खरीद बंद कर दी जाती है तो कभी केंद्रों पर जगह न होने का हवाला देकर तुलाई रोक दी जाती है। इससे किसानों को कई दिनों तक केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।