उरई/रामपुरा। विकासखंड रामपुरा क्षेत्र के मई और बूढ़ेरा मौजे में समय पर सफाई न होने से नहर व बंबे के ओवरफ्लो और पटरी से रिसाव के कारण किसानों की करीब 120 से अधिक बीघा फसल पानी में डूब गई। मंगलवार रात से लगातार बढ़ते जलस्तर ने खेतों को तालाब में तब्दील कर दिया। इससे गेहूं, सरसों, चना और मटर की फसल को भारी नुकसान की आशंका है। विभागीय लापरवाही की वजह से किसानों को खुद ही मेड़ ऊंची कर फसल बचानी पड़ रही है।
रामपुरा क्षेत्र में एक दिन पहले बंबे का पानी ओवरफ्लो होने से मल्हानपुरा गांव तक नहर का पानी घरों और खेतों में घुस गया था। इसके बाद ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे अधिकारियों व कर्मचारियों ने पानी के वेग को कम करवाकर और नहर में मिट्टी डलवाकर पानी को गांव की ओर जाने से रोका था।
वहीं, विभागीय लापरवाही से बुधवार की सुबह मई और बूढ़ेरा के खेतों में तेजी से पानी भरने लगे। किसानों को जानकारी होने पर वह पहुंचे और अपनी-अपनी मेड़ों को ऊंचा कर पानी को भरने से बचाने लगे, लेकिन फिर भी करीब 120 बीघा फसल में पानी भर गया।
किसानों की मटर, मसूर, सरसों आदि फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है। मई गांव निवासी किसान दिनेश कुमार ने बताया कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों को नहर का जलस्तर कम करने का निवेदन किया गया था, लेकिन पानी कम होने के बजाय और बढ़ गया। इससे रवि, राजेंद्र सिंह, उमा सिंह, प्रेम सिंह, चंदन, राजपाल सिंह, राजकुमार समेत कई किसानों की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि नहर की पटरी हाल ही में बनाई गई थी, लेकिन फुल गेज पर पानी चलने के कारण पटरी रिसाव पकड़ गई और आसपास के खेतों में दूर-दूर तक पानी फैल गया।
किसानों का कहना है कि पानी भरने से फसल बचने की उम्मीद बहुत कम बची है। विभाग की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि अगर वेग कम नहीं हुआ तो और फसल को नुकसान हो सकता है।
किसान सब तरफ से बर्बाद हो रहे
फोटो -22 शिव प्रताप सिंह
पहले ही वह बेमौसम बारिश व अन्य चीजों से जूझकर आए हैं। फसल को बचाने के लिए कई इंतजाम कर रहे हैं। वहीं, अब जिम्मेदारों की लापरवाही से उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। समझ में नहीं आ रहा है कि फसल को कैसे बचाएं।
- प्रताप सिंह, मई
फोटो -23 दिनेश सिंह।
किसानों को इस समस्या से न जूझना पड़े, इसके लिए विभागीय अधिकारियों को पहले से इंतजाम कर लेना चाहिए था। इससे उनकी फसल पर कोई असर नहीं पड़े। समय से पानी मिल नहीं रहा है, ऊपर से फसल और डूब रही है। अब क्या करें।
- दिनेश सिंह, मई
वर्जन
नहर की पटरी और बंबे पर रात से निगरानी की जा रही है और उच्चाधिकारियों को पानी कम कराने की जानकारी भेज दी गई है। जल्द पानी का स्तर नियंत्रण में लाने का प्रयास किया जा रहा है।
- शैलेंद्र कुमार, जेई, नहर विभाग
फोटो - 24 नहर की पटरी फटने से जलमग्न हुई फसल। संवाद
नहर की पटरी फटी, पचास बीघा फसल हुई जलमग्न
कुठौंद। ब्लॉक के कुरौली में नहर की पटरी फटने से करीब 50 बीघा फसल जलमग्न हो गई। अचानक आए पानी ने खेतों में खड़ी फसलों को पूरी तरह डुबो दिया। इससे किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद हो गई। किसान भूरे, कल्लू पांडेय, हनुमंत राठौर, राजू आदि ने बताया कि गेहूं और अन्य रबी फसलें बोआई के बाद तैयार भी नहीं हो पाईं थीं कि पानी भर जाने से नष्ट हो जाएंगी।
बताया कि विभागीय लापरवाही से खेतों में पानी इतनी वेग से भरा कि उसे रोका नहीं जा सका। आरोप है कि जब फसलों को सिंचाई की आवश्यकता थी, तब नहर में पानी नहीं छोड़ा गया। उस समय किसानों को महंगे डीजल और बिजली का उपयोग कर ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ी थी। अब जब फसलें उग आईं हैं तो बेवजह पानी को छोड़कर किसानों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन और सिंचाई विभाग से तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। (संवाद)