उरई। जन औषधि केंद्र में पर्याप्त दवाओं के इंतजाम है, फिर भी डॉक्टर मरीजों को महंगी दवाइयां बाहर से खरीदने के लिए लिख रहे हैं। मरीजों का कहना है कि यदि वह जन औषधि केंद्र से दवाइयां ले भी आते हैं तो डॉक्टर उन्हें नकार देते है और जो पर्चे में लिखी दवा लाने के लिए कहते हैं।
शहर में दो जन औषधि केंद्र हैैं। एक जन औषधि केंद्र जिला अस्पताल में बना है और दूसरा मोहल्ला गोपालगंज में संचालित है। जन औषधि केंद्र के संचालक संजय नागर का कहना है कि जन औषधि केंद्र सुबह नौ बजे से शाम साढ़े छह बजे तक संचालित है। यहां पर बाजार के मुकाबले 15 से 17 गुना तक सस्ती दवाएं मिलती हैं।
बाजार में ह्दय रोग की जो दवा बाजार में 20 रुपये की होती है तो जन औषधि में सिर्फ पांच रुपये की मिल जाती है। फिर भी डॉक्टर बाजार की दवाएं लिख रहे हैं। जिला अस्पताल में एंटीबायोटिक दवा के नाम पर सिफेक्जिम, एमोक्सीसाइक्लिन जैसी दवाएं उपलब्ध हैं लेकिन फिर भी महंगी कंपनियों की दवाएं लिखी जाती हैं।
जिला अस्पताल में वर्ष 2018 में जन औषधि केंद्र खुलने से मरीजों को राहत मिली है। केंद्र संचालक का कहना है कि औषधि केंद्र पर अधिकांश जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन अक्सर कई डॉक्टर ऐसी दवाएं लिख देते हैं जो हमारे पास किसी दूसरे नाम से उपलब्ध होती है। ऐसे में मरीज बाहर से ही दवा लेने को मजबूर होते हैं।
यदि कुछ डॉक्टर ऐसे कर रहे हैं तो उन्हें ज्यादा से ज्यादा जन औैषधि केंद्र की दवाएं लिखने के लिए निर्देशित किया जाएगा। डॉ. अवनीश कुमार, सीएमएस, जिला पुरुष अस्पताल