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बाढ़ से बेपटरी हुई जिंदगी, हर तरफ खतरा

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देवकली में ग्रामीणों से बात करते डीएम मन्नान अख्तर - फोटो : ORAI
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कालपी/कदौरा/रामपुरा। तीन दिन से नदियों के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की जिंदगी बेपटरी कर दी है। फसलों का नुकसान हुआ तो हुआ अब तो उनकी जान पर तक बन आई है। बाढ़ के पानी ने गांव में प्रवेश किया तो सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं। घरों में पानी घुसा तो मुसीबत और बढ़ गई। सारा सामान लेकर लोगों को मकान की छतों पर आशियाना बनाना पड़ रहा है। घरों पर रखा अनाज और मवेशियों का चारा तक सब बह गया है। कई मवेशी भी डूबकर मौत की नींद सो चुके हैं। पानी के साथ घरों में घुसते जीव जंतु भी जान का खतरा बने हुए है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी कम होने के बाद भी मुश्किलें कम नहीं बल्कि बढ़ेंगी, तब संक्रामक रोग फैलने शुरू होंगे।
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कालपी प्रतिनिधि के मुताबिक कागजीपुरा, तरीबुल्दा, रामगंज, आलमपुर, टरननगंज आदि मोहल्लों में जलभराव है। हीरापुर, देवकली, नरहान, पडऱी, उरकरा, मंगरौल, सिमरा, महेबा आदि गांव तो पानी में डूबे हैं। यहां लोगों को गृहस्थी का सामान समेटकर छतों पर डेरा डालना पड़ रहा है। इन शहरी और ग्रामीण इलाकों की बिजली व्यवस्था भी ध्वस्त पड़ी हुई है, क्योंकि बिजली के खंभे ही नहीं पूरे के पूरे ट्रांसफार्मर ही पानी में डूबे दिखाई दे रहे हैं।
कदौरा प्रतिनिधि के मुताबिक गुलौली गांव में यमुना का रौद्र रूप देख लोगों की सांसे थमी हुई हैं। गांव के स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र सभी पानी में डूबे हुए हैं। नदी का पानी गांव के पुल से बस कुछ ही दूरी पर रह गया है। पुल पर चलते हुए भी लोगों को खौफ सता रहा है। प्रशासन से मदद के नाम पर सिर्फ एक लेखपाल ही आते जाते दिखाई दे रहे हैं और किसी तरह बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। प्रधान प्रतिनिधि अब्दुल हई का कहना है कि आधे से ज्यादा गांव पानी में डूबा हुआ है और कोई मदद नहीं मिल रही है।
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रामपुरा प्रतिनिधि के मुताबिक कुछ ऐसी ही खौफनाक तस्वीर बीहड़ के गांवों की भी है। यहां पर भी बाढ़ ने गांव के गांव को अपनी चपेट में ले रखा है। बीहड़ के बिलौड़, मिरजापुरा, हुकुमपुरा, कूसूपुरा, मोहब्बतपुरा, सिदपुरा, डिकौली जागीर कुछ ऐसे गांव हैं, जहां साधारण दिनों में शिक्षक और डॉक्टर जाने से कतराते हैं फिर बाढ़ से डूबे इन गांवों का हाल लेने की किसे फुर्सत है। गांव के स्कूल डूबे हुए हैं, अस्पताल खाली पड़े हैं और लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए छतों को आश्रय केंद्र बना रखा है। कई मवेशी डूबकर मर चुके हैं, जिनके शव पानी कम होने के बाद जानलेवा बीमारियों के साथ ही सामने आएंगे। एडीएम प्रमिल कुमार का कहना है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में डॉक्टरों की टीम और काने पीने का सामान भेजने का काम किया जा रहा है।

गुलोली गांव में पानी में डूबा ट्रैक्टर- फोटो : ORAI

गुलोली गांव के पुल पर पहुंचा पानी- फोटो : ORAI

प्राथमिक विद्यालय बिलौड मे भरा पानी- फोटो : ORAI

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