उरई। ससुराल में पत्नी की कुल्हाड़ी से हत्या करने वाले पति को जिला न्यायाधीश लल्लू सिंह ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
जिला शासकीय अधिवक्ता लखनलाल निरंजन ने बताया कि सिरसाकलार थाना क्षेत्र के गढ़गवां निवासी कुंवर सिंह तोमर ने 30 नवंबर 2010 को सिरसाकलार पुलिस को तहरीर दी थी। बताया था कि बेटी की शादी 1994 में मध्यप्रदेश के भिंड जनपद के ग्राम हरीपुरा निवासी राघवेंद्र सिंह के साथ हुई थी, जिससे दो संतानें थी। अक्सर दामाद बेटी से विवाद करता था। दामाद राघवेंद्र कुछ दिन से ससुराल में रह रहा था।
30 नवंबर 2010 की रात घर के सभी लोग खाना खाकर सोने चले गए थे। रात करीब तीन बजे बेटी की चीख सुनकर परिजन कमरे से बाहर आए तो देखा कि बेटी की खून से लथपथ लाश जमीन पर पड़ी है और दामाद हाथ में कुल्हाड़ी लिए हुए है। परिजनों ने दामाद को पकड़ना चाहा तो वह मौके से भाग निकला। पुलिस ने दामाद पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए कई जगह दबिश दी, लेकिन पकड़ नहीं पाई।
फिर पुलिस ने 23 जुलाई 2011 को कोर्ट में उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट में हाजिर न होने पर उसे फरार घोषित कर दिया गया था। साथ ही कुर्की की कार्रवाई भी हुई। आठ अगस्त 2019 को पुलिस ने राघवेंद्र को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने पत्नी रीना (35) पर लेनदेन को लेकर विवाद करने और चाल-चालन ठीक न होने की बात बताई। राघवेंद्र के खिलाफ भिंड जनपद में भी कई मामले दर्ज हैं।
पांच साल जिला न्यायाधीश लल्लू सिंह के कोर्ट में चले ट्रायल के बाद मंगलवार को सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान व साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने राघवेंद्र सिंह को पत्नी की हत्या में दोषी पाया। उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।