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लला फिकर नाहिं करो, जीतबे की तैयारी करो

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कदौरा ब्लाक के हरचंद्रपुर गांव में चाय की दुकान पर लगी चुनावीं चौपाल। - फोटो : ORAI
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उरई। नामांकन और नाम वापसी के बाद अब चुनावी घमासान और तेज हो गया। प्रत्याशियों की तरह अब मतदाता भी वादे करने लगे हैं और लगभग हर दूसरे पांव छूने वाले प्रत्याशी को जीत का आशीर्वाद दे रहे हैं। गांवों का नजारा यह है कि तपती दोपहर में बिना कोरोना भय के दल बल के साथ प्रत्याशी वोट के लिए हाथ जोड़ते घूम रहे हैं। दोपहर को घरों के भीतर सोते मतदाताओं के दरवाजों की कुंडियां खटखटा रहे हैं।
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भीतर से आवाज आती है कि कौन पार्टी है, बाहर खड़े प्रत्याशी ने पार्टी बताई तो भीतर से वोट देने का वादा भी कर लिया जा रहा है। यदि प्रत्याशी निर्दलीय है तो बाहर आकर इतना जरूर कहा जा रहा है कि लला, तुम फिकर कतई न करो, तुम तौ सिरफ जीतबे की तैयारी करो। यह सुनते ही गांव की सरकार बनाने का दम भरने वाले प्रत्याशी का उत्साह सातवें आसमान पहुंच जाता है।
यह नजारा किसी एक दो गांव में नहीं बल्कि कदौरा, महेवा, रामपुरा, माधौगढ़, नदीगांव, जालौन आदि सभी नौ ब्लाकों के 550 से अधिक गांवों का है। अब तो चुनाव चिह्न भी मिल गया है तो प्रत्याशी अपने जुलूस के साथ छाता, बकरी, छड़ी आदि प्रतीक चिह्न भी लेकर चल रहे हैं। जहां भी जिस किसी चाय की दुकान, पेड़ के नीचे या फिर किसी दरवाजे पर चार पांच मतदाता दिखाई देते हैं, वहां नेता अपने समर्थकों के साथ दस पंद्रह मिनट रुकते हुए वोट देने की अपील भी करने लगते हैं।
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जालौन के लौना, गिदौसा, सहाव, सिकरीराजा, कदौरा ब्लाक के आटा, परासन, बबीना, हरचंद्रपुर, रामपुरा ब्लाक के बिलौड़, सुल्तानपुरा, सिद्वपुरा, राठौरनपुरा, डकोर ब्लाक के ऐरी रामपुरा, जैसारी, मुहम्मदाबाद आदि के ग्रामीणों का कहना है कि सुबह की चाय हो या दोपहर का खाना दोनों ही निपटाना मुश्किल हो गया है। कोई न कोई जरूर वोट मांगने के लिए आ धमकता है।
अब जब चुनाव की तारीख नजदीक आ गई है तो प्रत्याशियों को अपने बाहर के वोटों की चिंता सताने लगी है। जिनके परिजन बाहर हैं, उन्हें पूरी तरह से आश्वस्त किया जा रहा है कि बहू-बेटों को हर हाल में 24 तक बुला लो, खर्च की चिंता बिल्कुल भी करो।
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