उरई। जिले में जल्द ही जल पुलिस थाना बनेगा। शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। यमुना, बेतवा, चंबल, सिंध, पहूज और कुंवारी नदियों के किनारों पर आए दिन डूबने की घटनाएं और नाव संचालन जैसी गतिविधियों को देखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
जालौन का अधिकतर क्षेत्र नदियों और बीहड़ों से घिरा हुआ है। पचनद संगम, कालपी का यमुना व बेतवा तट क्षेत्र पर बड़ी संख्या में लोग मछली पकड़ने, नाव चलाने और धार्मिक स्नान के लिए पहुंचते हैं। कई बार डूबने की घटनाएं या अवैध गतिविधियां होती हैं। इनकी सूचना मिलने पर थाना पुलिस को दूर-दराज से पहुंचना पड़ता है। इससे बचाव कार्य में देरी होती है। इससे कई बार व्यक्ति को नहीं बचाया जा सकता है। अब जल थाना बनने के बाद ऐसे हादसों में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू हो सकेगा।
अधिकारियों की माने तो जल थाना बनने से जिले के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। नदी में डूबने या नाव पलटने जैसी घटनाओं पर तुरंत रेस्क्यू टीम की कार्रवाई होगी। श्रद्धालुओं, मछुआरों और किसानों को सुरक्षित माहौल मिलेगा। पुलिस की पहुंच अब दूरस्थ नदी क्षेत्रों तक तेजी से और प्रभावी रूप में संभव होगी। यह थाना जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों में अहम भूमिका निभाएगा। (संवाद)
जल थाना में क्या-क्या सुविधाएं होंगी
- अत्याधुनिक मोटर बोट्स और रेस्क्यू नौकाएं रहेंगी।
- प्रशिक्षित ड्राइवरों और जल पुलिसकर्मियों की टीम तैनात की जाएगी।
- जलमार्गों की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरे और वायरलेस संचार प्रणाली होगी।
- डूबने की घटनाओं के लिए रेस्क्यू उपकरण और लाइफ जैकेट्स उपलब्ध रहेंगे।
- पचनद मेला, माघ मेला व देवउठनी एकादशी जैसे अवसरों पर विशेष सुरक्षा प्रबंध किए जाएंगे।
वर्जन
जिले में जल थाना की स्थापना के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। शासन की स्वीकृति मिलते ही जल थाना की स्थापना शुरू कर दी जाएगी।
- संजय कुमार, एडीएम, जालौन