कोटा बैराज से पानी छोड़ने के कारण यमुना में बाढ़ का खतरा फिर बढ़ गया है और खतरे के निशान से मात्र एक मीटर नीचे बहने से तटवर्ती ग्रामों के लोगों में बाढ़ का खौफ है और तटवर्ती ग्रामों में प्रधानों के साथ राजस्व कर्मियों की तैनाती कर दी गई है। एसडीएम व तहसीलदार ने संयुक्त रूप से बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।
कालपी में यमुना नदी केे खतरे का लाल निशान 108 मीटर पर है। केंद्रीय जल आयोग कालपी केेंद्र प्रभारी हरदयाल ने बताया कि रविवार को यमुना का जलस्तर जहां 102 मीटर था, वहीं, बैराज से पानी छोड़ने से यमुना उफनाने लगी है। सोमवार शाम 5 बजे तक जलस्तर 107 मीटर पर पहुंच गया है। जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। अगर इसी प्रकार जलस्तर
बढ़ता रहा तो खतरे का निशान पार कर जाएगा। यमुना की बाढ़ को लकर जीतामऊ, पाल, सरैनी, कोड़ा किर्राही, दहेलखंड, गुढ़ा, मैनूपुर, हीरापुर, कीरतपुरा, रायड़, गुलौली, मदरालालपुर आदि तटवर्ती ग्रामों के लोग चिंतित हैं। यमुना में बाढ़ की आशंका से एसडीएम जलराजन चौधरी व तहसीलदार जितेंद्र पाल ने तटवर्ती ग्रामों का भ्रमण किया। एसडीएम के
अनुसार कदौरा हिमनपुर मार्ग पर पाताल गंगा नाले में बने रपटा पानी से डूब जाने से नाव चलाने के लिए लेखपाल इंद्रपाल की देखरेख में गोताखोरों व नाविकों को तैनात किया गया है। वहीं, चंदरसी में नाव चलवाई जा रही है।