उरई। जिस कारागार में सख्त जेलर के नाम से जिसकी हनक चलती थी। चार सुरक्षा कर्मियों के साथ जिन बैरकों का वह निरीक्षण करने निकलता था। तत्कालीन जेलर नत्थू सिंह ने सोचा नहीं होगा कि उसी जेल की बैरक नंबर दो कभी उसका नया ठिकाना होगा।
वर्ष 2010 के 20 मार्च को जेल में हुई गैंगवार के दौरान माफिया मुख्तार अंसारी की गैंग का सदस्य प्रिंस अहमद अंसारी और उसका दोस्त नाजिर को खूब पीटा गया था। लाठियां चली थीं। बुरी तरह से जख्मी दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज चला, लेकिन दोनों ने दम तोड़ दिया। इस मामले में नाजिर के पिता आयूब खां की तहरीर पर जेल अधीक्षक अविनाश गौतम, जेलर नत्थू सिंह, डिप्टी जेलर जी मिश्रा, सिपाही, राममनोरत, रामशरण, राजकुमार, नृपेंद्र, अनिल शर्मा, शशिकांत तिवारी, उस वक्त रहे बंदी सुघर सिंह, सत्यभान उर्फ लाला, राजा भैया, राजू तीतरा, रामनारायण, अखिलेश, मुन्ना केवट के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। चार्जशीट में भी इनके नाम शामिल थे।
जेल अधीक्षक और डिप्टी जेलर को छोड़ जेलर समेत सभी के खिलाफ बुधवार को ट्रायल पूरा हुआ। जेलर व उसके छह साथी सिपाही और सात बंदियों को उम्र कैद सुना दी गई। जेल पहुंचा तो उसे उसके छह साथी सिपाहियों के साथ बैरक नंबर दो में रखा गया। उसके साथ दोषी पाए गए छह बंदी उसके बगल के ही बैरक नंबर एक में बंद हैं।
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दोषी पूर्व जेलर व उनके छह साथी बैरक नंबर दो में और अन्य सात दोषी को बैरक नंबर एक में रखा गया है। सभी पूरी निगरानी में हैं।
-नीरज देव, जेल अधीक्षक