कोंच। बुंदेली साहित्य के कवि स्वर्गीय भवानीशंकर लोहिया बंधु की दूसरी पुण्यस्मृति में काव्य गोष्ठी का आयोजन अवधबिहारी लाल जी मंदिर में किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता साहित्यकार नरेंद्र स्वर्णकार मित्र ने की। कवियों ने सम सामयिक रचनाएं पढ़कर श्रोताओं को आनंदित किया।
चंद्रप्रकाश रावत ने सरस्वती वंदना के साथ वंदना से गोष्ठी को गति प्रदान की गई। मुख्य अतिथि सुनीलकांत तिवारी ने मौजूदा राजनीति पर करारा व्यंग्य करते हुए रचनापाठ किया, ‘हवन किया तब हाथ जले हैं छोड़ो बाबू, हम अपनों के हाथ छले हैं छोड़ो बाबू। राजेंद्र सिंह गहलौत रसिक ने रचना बांची, गम भुलाने की सूरत बता दीजिए, दिल सुकूं पाए वो मशविरा दीजिए। संचालन कर रहे आनंद शर्मा अखिल ने कहा, ‘तेरी हर चीज रखी है तेरी हर बात रखी है, मेरे जज्बात की संदूक में इक महकती सौगात रखी है। शायर हसरत कोंचवीं ने गजल पढी, ‘कब हमने कहा बंगले हमें कोठियां दे दो, भूखा न रहे पेट हमें रोटियां दे दो।’ मोहनदास नगाइच ने सुनाया, ‘जिनका है किरदार फरेबी जिनकी फितरत झूठी है।’
गोष्ठी में मुन्ना यादव विजय, संतोष तिवारी सरल, भास्कर सिंह माणिक्य, नंदराम भावुक, ओंकारनाथ पाठक, दिनेश मानव, डॉ. हरिमोहन गुप्त, संजीव सरस, संजय सिंघाल, अरुण वाजपेयी आदि नेे भी रचनापाठ किया। गोष्ठी के संयोजक श्यामजी लोहिया ने कवियों का स्वागत करते हुए आभार जताया। इस दौरान साकेत शांडिल्य, राजा तिवारी, महेशशंकर, रामकृष्ण वर्मा, जवाहर अग्रवाल, अतुल, संजू सोनी, ऋषभ दुबे, विनोद सोनी, वीरेंद्र, नरेंद्र सोनी, आकाश छावला आदि मौजूद रहे।
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