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Jalaun News: झोपड़ी में लगी आग, भाई की मौत, बहन झुलसी

Sun, 02 Jun 2024 01:32 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
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जालौन। मजदूर की झोपड़ी में अज्ञात कारणों के चलते आग लग गई। आग की चपेट में आने से मजदूर के आठ वर्षीय पुत्र की जलकर मौत हो गई। जबकि, नौ वर्षीय बेटी गंभीर रूप से झुलस गई। सूचना मिलने पर एसडीएम, सीओ समेत कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और मजदूर को सांत्वना देने के साथ ही दैवी आपदा के तहत मुआवजा दिलाने का आश्वासन भी दिया।
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कोतवाली क्षेत्र के दहगुवां गांव निवासी लोकेंद्र सिंह के पास मध्यप्रदेश के ग्वालियर जनपद के थाना आरोन निवासी परमाल मजदूरी का काम करता है। घर के पास ही वह अपनी पत्नी नीतू उर्फ गुड्डी देवी व चार बच्चों के साथ झौपड़ी बनाकर रहता है। शनिवार दोपहर वह मजदूरी कर रहा था। झोपड़ी में पत्नी बच्चों के साथ थी। दोपहर करीब साढ़े 11 बजे अचानक से झोपड़ी में आग लग गई। घास फूस की झोपड़ी में आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया।
आग की लपटें देख झोपड़ी के अंदर से गुड्डी देवी बच्चों को लेकर बाहर की ओर भागी। लेकिन जलती हुई आग में उनका आठ वर्षीय बेटा दीपक और नौ वर्षीय बेटी निशा फंस गए। उधर, आग लगी देखकर परमाल और गांव के अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए। लोगों ने आग में झुलस गई निशा को किसी तरह बाहर निकाल लिया लेकिन वह दीपक को बाहर नहीं निकाल सके। आग में झुलसकर दीपक की मौके पर ही मौत हो गई।
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ग्रामीणों ने हादसे की जानकारी एसडीएम व कोतवाली पुलिस को दी। सूचना मिलते ही एसडीएम अतुल कुमार, सीओ रामसिंह व कोतवाल विमलेश कुमार मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने दीपक के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। निशा को पहले सीएचसी भेजा गया। जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे पहले मेडिकल कॉलेज उरई और वहां से झांसी रेफर किया गया। बेटे की मौत से रो रोकर बेहाल माता पिता को एसडीएम व सीओ ने सांत्वना दी और अिकसी तरह समझा बुझाकर शांत कराया। एसडीएम ने परिजनों को दैवीय आापदा के तहत आर्थिक मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। एसडीएम ने बताया कि झोपड़ी में आग लगने से आठ वर्षीय मजदूर के बेटे की मौत हुई है। दैवी आपदा के तहत मुआवजा दिलाने के लिए फाइल तैयार कर अधिकारियों को भेजी जा रही है।

बच्चों को बाहर निकालने के लिए चीखती चिल्लाती रही मां
जालौन। परमाल के तीन बेटे व एक बेटी है। सबसे छोटा बेटा भूपेंद्र पांच माह का है। उससे बड़ा अवधेश चार वर्ष का है। आग लगने के बाद मां दोनों बेटों को गोद में लेकर बाहर आ गई थी। जबकि बड़ी बेटी निशा व बेटे दीपक को भी दौड़कर बाहर निकलने के लिए कहा। लेकिन जब तक वह दोनों बाहर निकलने तब तक घास फूस की झोपड़ी में लगी आग ने उन्हें बाहर निकलने का मौका ही नहीं दिया। मां बाहर से दोनों बच्चों को बाहर निकालने के लिए चीखती चिल्लाती रही। बेटी को लोगों ने बाहर निकाल लिया लेकिन वह दीपक को नहीं बचा सके।
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