उरई। राजकीय इंटर कॉलेज में आंधी के कारण तारों में हुई स्पार्किंग से आग लग गई। जिस जगह आग लगी, वहां लकड़ियां, खराब फर्नीचर व पेड़ों के सूखे पत्ते पड़े होने से आग भयावह हो गई। गनीमत रही कि ड्यूटी पर तैनात चौकीदार और सिपाही ने समय से दमकल को सूचना दे दी। जिससे बड़ा हादसा बच गया।
शुक्रवार रात पौने बारह बजे आई आंधी से जीआईसी में लगे तारों से हुई स्पार्किंग से आग लग गई। आग ने पहले सूखे पत्तों और फिर वहां रखीं लकड़ियों को चपेट में ले लिया। धीरे-धीरे बिजली की केबल भी चल गई। आग देखकर जीआईसी में यूपी बोर्ड की कापियों की निगरानी कर रहे पुलिस के दीवान ने इसकी सूचना दमकल विभाग व प्रधानाचार्य जितेंद्र राजपूत को दी।
आग इतनी जबरदस्त थी कि दमकल को आग बुझाने में करीब दो घंटे की मशक्कत करनी पड़ी। गनीमत रही कि जहां आग लगी थी, वहां मिडडे मील की रसोई, कंप्यूटर लैब और साइंस लैब भी थी। समय से आग पर काबू पाने के कारण ज्यादा नुकसान नहीं हो पाया। आगजनी में बिजली की केबल भी जल गई। इसकी वजह से जीआईसी में बिजली सप्लाई ठप हो गई। बिजली न आने के कारण पानी सप्लाई भी बाधित हो गई। इससे शनिवार को कॉलेज में पढ़ने वाले करीब चार सौ विद्यार्थी पानी के लिए परेशान रहे।
प्रधानाचार्य ने बताया कि उन्होंने घटना की सूचना बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता को दे दी है। प्रधानाचार्य जितेंद्र राजपूत का कहना है कि जर्जर तारों की समस्या को लेकर वह कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों को अवगत भी करा चुके हैं। कई बार बिजली कर्मी विद्यालय आए और देखकर चले गए। लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया। जिसकी वजह से रात में यह घटना घट गई।
न होते दीवान तो हो जाता ज्यादा नुकसान
बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की निगरानी के लिए पुलिस की भी ड्यूटी लगाई गई थी। वैसे उत्तर पुस्तिकाएं शुक्रवार शाम को चली गई थी और उनकी ड्यूटी शनिवार तक थी। इसलिए रात में दीवान वहीं रुक गए थे। जीआईसी में चौकीदार की भी ड्यूटी थी लेकिन उसके पास मोबाइल नहीं था। दीवान ने समय रहते दमकल और प्रधानाचार्य को घटना से अवगत करा दिया, वर्ना ज्यादा नुकसान हो सकता था।