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Jalaun News: टूटे खंभे और जर्जर तारों के कारण 25 गांवों में दो दिन से बिजली ठप

Sat, 24 May 2025 12:35 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
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उरई। आंधी पानी से चरमराई बिजली व्यवस्था को अब तक पटरी पर नहीं लाया जा सका है। शहर में सप्लाई तो चालू हो गई है, लेकिन बिजली कटौती से राहत नहीं मिल रही है। हर फीडर से एक घंटे में कट लग रहा है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति अत्यंत खराब है। यहां अब तक नए खंभे ही नहीं पहुंच पाए हैं।
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बुधवार की रात आई आंधी-पानी से सैकड़ों बिजली के खंभे और तार टूट गए थे। इससे विभाग को लगभग एक करोड़ का नुकसान हुआ। गुरुवार दोपहर दो बजे तक शहर में बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने का काम हुआ। इसके बाद रहिया और इंदिरा नगर में सप्लाई बहाल हुई।
उधर, जालौन में काशीपुरा स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में सोलर पैनल उड़कर क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं, न्यामतपुर बिजलीघर से जुड़े गांवों में दूसरे दिन भी बिजली नहीं आ सकी। पाल, सरैनी, सिमरा, शेखपुर, जरारा, निपनिया, रिछारा, भगौरा, हिम्मतपुर, दहेलखण्ड, कोढ़ा, किर्रही, टड़वा गांवों में खंभे टूटने से रात से अब तक बिजली नहीं आई। क्षेत्र के सुनील, त्रिलोक नारायण, बीर सिंह, कन्हई का कहना है कि बुधवार रात से बिजली नहीं आई है। पानी की भारी किल्लत है, ऐसी गर्मी में हैंडपंप पर लाइन लगानी पड़ रही है। न्यामतपुर के जेई नवीन सचान का कहना है कि जहां तार टूटे हैं, उन गांवों में बिजली आज आ जाएगी। जहां खंभे टूटे हैं, वहां एस्टीमेट भेजकर खंभे मंगवाने पड़ेंगे।
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सिरसा कलार बिजलीघर से जुड़े पांच गांवों में भी बिजली अब तक नहीं आई है। करहैया, मानपुर, छानी, लोहाई, मडैया गांव के लल्लू, कैलाश, सोनू, हरेंद्र, रोशन, राजेश का कहना है कि भीषण गर्मी पड़ने से रात को नींद नहीं पूरी हो पा रही है। पानी की समस्या ज्यादा है। सिरसा कलार के जेई अभिषेक सिंह का कहना है कि छानी गांव में शुक्रवार की रात तक बिजली आ जाएगी।
वहीं, मैनूपुर में बुधवार की रात गांव के बाहर लगे ट्रांसफार्मर के पोल पर नीम का पेड़ गिर गया था, जिससे पोल टूट गया। अभी तक इन विद्युत खंभों को खड़ा नहीं किया गया है, जिससे गांववासी भीषण गर्मी और अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। गांव निवासी अरविंद, राजू, नेक सिंह, ब्रह्म नारायण, सूरज, अनोखे, राजाराम आदि ने बताया कि पिछले दो दिन से बिजली नहीं है।गांव की आबादी लगभग साढ़े चार हजार है। अवर अभियंता नवीन कुमार का कहना है कि तेज आंधी के कारण महेवा फीडर की मेन लाइन टूट गई थी। सही करवाया जा रहा है।
आटा क्षेत्र के गांव जोरखेरा और रिरुआ में छह दिन बाद फिर से बिजली आपूर्ति बहाल हो गई है। आटा विद्युत उपकेंद्र से संदी होते हुए जोरखेरा और रिरुआ गांव के लिए गई हाईटेंशन लाइन के दो खंभे छह दिन पहले आई आंधी में टूट गए थे। तब से दोनों गांवों के पांच हजार लोग अंधेरे और गर्मी से परेशान हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद बिजली विभाग के अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो ग्रामीणों की समस्याओं को अमर उजाला अखबार ने 21 और 22 मई के अंकों में प्रमुखता से उठाया। इसके बाद बिजली विभाग हरकत में आया और मौके पर टीम भेजकर टूटे खंभों को बदलवाया गया। इसके बाद हाईटेंशन लाइन को दोबारा चालू कर बिजली आपूर्ति बहाल की गई।
उधर माधौगढ़ क्षेत्र के 14 गांवों में अब तक अंधेरा है। शुक्रवार को भी गांवों में बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं हो सकी। ग्रामीण पवन कुमार, संजू सिंह और इंद्रजीत सिंह का कहना है कि बिजली न आने से पानी की भारी समस्या हो गई है। करीब 35 पोल टूटे पड़े हैं। हर गांव में कुछ हिस्सों में अब तक सप्लाई नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीणों के अनुसार लगभग पांच की आबादी अंधेरे में है और यह स्थिति दो से तीन दिन और बनी रह सकती है। हर गांव में 40 से 50 घर अंधेरे में हैं।
इसके साथ ही अजीतापुर में सात हजार की आबादी, नवादा में 15 सौ की आबादी, सोनापुर में एक हजार की आबादी, गढि़या में दो हजार की आबादी, ईंटों में चार हजार की आबादी अंधेरे में है। बिजली विभाग के जेई आलोक खरे का कहना है कि अधिकांश गांवों में दो से तीन पोल टूटे हैं। जैसे ही खंभे उपलब्ध होंगे, बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। लाइनमैनों को निर्देश दे दिए गए हैं कि जहां-जहां पोल टूटे हैं, वहां गर्मी को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर बिजली चालू कराई जाए।
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