उरई। शहर के मोहल्ला उमरार खेरा में एक पानी की टंकी को भरने के लिए चार नलकूप हैं और आटोमैटिक सिस्टम के तहत चलते हैं। फिर भी मोहल्ले के लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी में बिजली कनेक्शन गलत जोड़ दिए जाने से पेयजल आपूर्ति ध्वस्त है। इस टंकी को शहरी फीडर से जोड़ने के बजाय ग्रामीण फीडर से जोड़ दिया गया है, जहां बिजली आपूर्ति अनियमित रहती है। अब हालात ये हैं कि लोग हर रोज पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ कागजी कार्रवाई हो रही है।
जल जीवन मिशन और नगर विकास की तमाम योजनाओं के बावजूद शहर के उमरार खेरा इलाके की बीस हजार आबादी पांच साल से जल संकट झेल रही है। 2019 में पेयजल पुनर्गठन योजना फेज-2 के अंतर्गत यहां जल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए करीब 13 करोड़ रुपये खर्च किए गए। चार नलकूप, एक पानी की टंकी, भूमिगत टैंक और ऑटोमेटेड मोटर सिस्टम तक लगाए गए। लेकिन सारी व्यवस्था बिजली कनेक्शन की तकनीकी गड़बड़ी के कारण फेल हो चुकी है।
जल निगम ने जल्दबाजी में टंकी को ग्रामीण फीडर से जोड़ दिया, जबकि यह पूरा इलाका शहरी क्षेत्र में आता है। ग्रामीण फीडर से बिजली आपूर्ति रोजाना औसतन 10 से 12 घंटे ही मिल पाती है, वह भी रुक-रुक कर। वहीं, आटोमैटिक मोटर सिस्टम को 24 घंटे स्थिर बिजली की जरूरत होती है ताकि टंकी और भूमिगत टैंक सही समय पर भर सकें। सुबह 7 बजे से बिजली कटौती शुरू हो जाती है और दिन में 11 से 12 बजे के बीच ही आती है, जिससे सिस्टम पूरी तरह ठप हो जाता है। इस वजह से इलाके के लोग वर्षों से बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।
बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता जितेंद्र नाथ ने कहा कि ग्रामीण फीडर में भी पर्याप्त बिजली दी जाती है। विभागीय प्रक्रिया पूरी हो तो शहरी फीडर से जोड़ने में कोई दिक्कत नहीं है। जैसे ही बजट मिल जाएगा तो काम शुरू कर दिया जाएगा। उसमें अलग से ट्रांसफार्मर, खंभे और तार लगाने पड़ेंगे। इन सब पर लाखों रुपये खर्च होंगे। जल संस्थान के जेई श्याम बहादुर ने कहा कि टंकी के लिए शहरी फीडर की जरूरत है। डीएम को लिखा गया है, लेकिन बजट अधिक होने के चलते काम लंबित है। कई बार शासन स्तर पर भी शिकायत की गई है। लेकिन बजट के चलते सब काम अधूरा पड़ा है।
शहरी फीडर से कनेक्शन में भारी खर्च
जल संस्थान और बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टंकी को शहरी फीडर से जोड़ने पर लगभग 50 लाख रुपये का खर्च आएगा। इस बजट की व्यवस्था न हो पाने के कारण काम लटक गया है। जल संस्थान के जेई श्याम बहादुर का कहना है कि टंकी को जब हैंडओवर किया गया था, उसी समय शहरी फीडर से कनेक्शन की बात कही गई थी। इस संबंध में डीएम को पत्र भी लिखा जा चुका है, लेकिन बजट न होने से काम शुरू नहीं हो पाया। स्थानीय सभासद माया देवी ने बोर्ड की बैठकों में कई बार यह मुद्दा उठाया है। यहां तक कि केंद्रीय राज्य मंत्री से भी इसकी शिकायत की गई, लेकिन नतीजा आज भी शून्य है। जल निगम, जल संस्थान और बिजली विभाग के बीच पत्राचार होता रहा, पर समाधान नहीं निकला।
शिकायतें करते-करते थक गए, सुनवाई नहीं होती
स्थानीय निवासी दीपक चौधरी ने बताया किक नल तो महीनों से सूखा पड़ा है। कब पानी आता है, पता ही नहीं चलता। शिकायतें करते-करते थक गए, लेकिन सुनवाई नहीं होती। टंकी का पानी भी कभी कभार नसीब हो पाता है। जब पूछो तो बताया जाता है कि बिजली नहीं आ र ही है। इससे समस्या सालों से बनी हुई है। ब्रजेश कुमार ने बताया कि पड़ोसी इलाके से पाइप जोड़कर पानी लाते हैं। गर्मियों में तो और भी बुरा हाल होता है। बच्चों तक को पानी भरने भेजना पड़ता है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी पानी की ठीक व्यवस्था नहीं की गई है। अगर बिजली ठीक से आने लगे तो सप्लाई में कोई परेशानी नहीं होगी।