फोटो- 27 सील किया गया टीआरडी स्टोर। संवाद
फोटो- 28 सील किया गया सीनियर सेक्शन इंजीनियर टीआरडी का कार्यालय। संवाद
- टीआरडी स्टोर और सीनियर सेक्शन इंजीनियर का कार्यालय सील
- नौकरी जारी रखने के लिए संविदा कर्मी से मांगी थी रिश्वत
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। झांसी मंडल के ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन (टीआरडी) विभाग में रिश्वत कांड उजागर होने के बाद रेल प्रशासन ने मंडलीय अभियंता (डीईई) टीआरडी समेत तीनों आरोपी रेलकर्मियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। वहीं, सीबीआई ने उरई स्थित टीआरडी स्टोर और सीनियर सेक्शन इंजीनियर भगवान सिंह पाल के कार्यालय को सील कर दिया है।
मोंठ निवासी संविदा ऑपरेटर सिद्धार्थ गौतम ने एसपी सीबीआई लखनऊ से शिकायत की थी कि सीनियर सेक्शन इंजीनियर बीएस पाल ने नौकरी बनाए रखने के एवज में 20 हजार रुपये रिश्वत मांगी और हर माह मानदेय 23 हजार में से 13 हजार रुपये देने का दबाव बनाया। सीबीआई ने 19 फरवरी की रात बीएस पाल को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पाल ने बताया कि यह रकम डीईई टीआरडी शांतनु सिंह और टेक्नीशियन प्रकाश कुशवाहा के कहने पर ली जा रही थी। इसके बाद दूसरी टीम ने चित्रकूट के रेलवे रेस्ट हाउस से दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया।
संविदा कर्मियों से वसूली और उत्पीड़न के आरोप
सूत्रों के मुताबिक आरोपी अधिकारी संविदा कर्मियों से वेतन का बड़ा हिस्सा सुविधा शुल्क के रूप में वसूलते थे। भुगतान न करने पर खाता बंद कराने और नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती थी। एक कर्मी ने आरोप लगाया कि 21 हजार रुपये तय वेतन में से पहले महीने पांच हजार और दूसरे महीने दस हजार रुपये काट लिए गए। तीसरे महीने विरोध करने पर उसका खाता बंद करा दिया गया। संविदा कर्मियों को सुबह आठ बजे से देर रात तक काम कराया जाता था और दो दिन से अधिक अवकाश नहीं दिया जाता था। मुख्यालय बिना सूचना छोड़े जाने पर वेतन काट लिया जाता था। रेलवे यूनियन की दखल के बाद भी हालात में खास सुधार नहीं हुआ।
छह डिपो का था चार्ज
डीईई शांतनु सिंह के पास उरई मुख्यालय सहित पुखरायां, घाटमपुर, भरुआ, डिगवाई और शिवरामपुर डिपो का प्रभार था। बताया जाता है कि नए संविदा कर्मियों की भर्ती से पहले डिपो में खंभे पर चढ़ाकर ‘टेस्ट’ लिया जाता था। टेक्नीशियन प्रकाश कुशवाहा को डीईई का करीबी माना जाता था और अधिकांश काम उसके माध्यम से होते थे। डीईई दिसंबर से रेलवे रेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे। आवंटित आवास में साज-सज्जा का अभाव बताकर उन्होंने प्रवेश नहीं किया था और स्थानीय अधिकारियों को आवास दुरुस्त कराने के निर्देश दिए थे।
अन्य विभागों में हुई है भर्तियां
रेलवे के कई विभागों में संविदा पर भर्ती की गई है। सिग्नल, कर्मिशियल विभाग में आउटसोर्सिंग से कर्मचारी तैनात किए गए है। इन कर्मियों ने भी संबंधित एजेंसी और रेलवे अधिकारियों पर वेतन से कटौती करने का आरोप लगाया है।
वर्जन
सीबीआई द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे गए तीनों रेलकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। जब तक वे जेल में रहेंगे, निलंबन प्रभावी रहेगा। साथ ही विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।-एसके त्रिपाठी, सीपीआरओ