उरई। सीएमओ कार्यालय में सोमवार को आयोजित दिव्यांगता बोर्ड में नाक, कान एवं गला (ईएनटी) विशेषज्ञ चिकित्सक के अनुपस्थित रहने से कई दिव्यांगों को निराश होकर लौटना पड़ा। चिकित्सक की गैरमौजूदगी के कारण उनकी जांच नहीं हो सकी और न ही दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए आवश्यक रिपोर्ट लग पाई।
सीएमओ कार्यालय में प्रत्येक सोमवार को दिव्यांगता बोर्ड का आयोजन किया जाता है। इसमें विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सक दिव्यांगजनों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। सोमवार को आयोजित बोर्ड में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक आर्या, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना विश्वास व नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एके पांडेय ने लाभार्थियों के आवेदनों पर आवश्यक रिपोर्ट लगाई लेकिन नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. बीपी सिंह के बोर्ड में उपस्थित न होने से सुनने संबंधी समस्याओं से पीड़ित छह से अधिक लाभार्थियों का कार्य नहीं हो सका।
कई लोग सुबह से अपनी बारी का इंतजार करते रहे, लेकिन चिकित्सक के न पहुंचने से उन्हें बिना जांच कराए लौटना पड़ा। पीड़ितों का कहना है कि दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने में सबसे अधिक परेशानी ईएनटी विभाग से जुड़ी जांचों में आती है। आरोप लगाया कि कई बार मरीजों को बीईआरए जांच के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिले में यह जांच सुविधा उपलब्ध न होने के कारण लोगों को कानपुर तक जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों खर्च होते हैं।
लाभार्थियों ने आरोप लगाया कि कई बार जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने के बाद भी प्रमाणपत्र के लिए रिपोर्ट लगाने में खामियां बताई जाती हैं। सोमवार को चिकित्सक के अनुपस्थित रहने से उनकी समस्या और बढ़ गई। लोगों का कहना था कि यदि डॉ. बीपी सिंह अवकाश पर थे तो उनकी जगह किसी अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए थी, ताकि दूर-दराज से आए मरीजों को परेशानी न होती। वहीं सीएमएस डॉ. जेजे राम ने बताया कि ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. बीपी सिंह अवकाश पर हैं।
बैरा जांच न होने से परेशान होते हैं मरीज
मूक बधिर फाउंडेशन के अध्यक्ष महेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि जिले में बीईआरए जांच की सुविधा न होने के कारण श्रवण बाधित लोगों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जांच के लिए कानपुर जाना पड़ता है और उसके बाद भी प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया लंबी हो जाती है। उन्होंने जिले में ही आवश्यक जांच सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।
बर्न वार्ड में मरीजों की देखरेख पर उठे सवाल
- तीमारदारों की शिकायत पर पहुंचे सीएमएस
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती मरीजों की समुचित देखभाल न होने का मामला सोमवार को सामने आया। मरीजों के तीमारदारों ने आरोप लगाया कि भर्ती होने के कई घंटे बाद तक कोई चिकित्सक मरीजों को देखने नहीं पहुंचा। नाराज परिजनों ने सीएमएस डॉ. जेजे राम से शिकायत की, जिसके बाद वह स्वयं वार्ड पहुंचे और स्टाफ को आवश्यक निर्देश दिए।
रामकुंड निवासी नाजरा (64) पत्नी हबीब को सोमवार सुबह उपचार के लिए जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया था। उनकी बेटी नगमा का आरोप है कि सुबह भर्ती होने के बावजूद दोपहर तक कोई चिकित्सक मरीज को देखने नहीं आया। इससे परिजनों की चिंता बढ़ गई और उन्होंने अस्पताल प्रशासन से शिकायत करने का निर्णय लिया। इसी प्रकार बसोव निवासी 24 वर्षीय अखिल के परिजनों ने भी वार्ड की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि अखिल पिछले दो दिनों से बर्न वार्ड में भर्ती है। रविवार को चिकित्सक मरीज को देखने आए थे, लेकिन सोमवार को काफी देर तक कोई डॉक्टर वार्ड में नहीं पहुंचा। इससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
शिकायत मिलने पर सीएमएस बर्न वार्ड पहुंचे और वहां भर्ती मरीजों का हालचाल जाना। उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स को निर्देश दिए कि मरीजों की स्थिति से समय-समय पर संबंधित चिकित्सकों को अवगत कराया जाए, ताकि उपचार में किसी प्रकार की देरी न हो। संबंधित चिकित्सक को भी वार्ड में जाकर मरीजों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही आईपीडी से बर्न वार्ड जाने वाले रास्ते की चैनल खुलवाने के भी निर्देश दिए।