कोंच। रामकुंड के मैदान पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में दूरदराज क्षेत्रों से आए कवियों ने आधी रात तक लोगों को गुदगुदाया। होली जैसे रंगीले पर्व की अगवानी को लेकर आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों और व्यंग्यकारों की बहार फुहार से लोग आनंद से सराबोर हो गए। वैभव दुबे झांसी ने सुनाया- देखकर गालों का रंग, बस मेरी होली हो गई।
माई होम स्कूल के निकट रामकुंड पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के इस आयोजन का श्रीगणेश वंदना से हुआ। दीप प्रज्ज्वलन नगर संघ चालक नरोत्तमदास स्वर्णकार नेे किया। विधायक माधौगढ़ मूलचंद्र निरंजन एवं सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा, विहिप अध्यक्ष साकेत शांडिल्य एवं माई होम स्कूल के प्रबंधक सुनीलकांत तिवारी आदि ने कवियों व अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। मधुप श्रीवास्तव रायबरेली ने हास्य प्रस्तुत किया, ये रेड जोन वाले डिस्ट्रिक्ट का क्या होगा, चेहरेे पर लगा मास्क तो लिपिस्टक का क्या होगा। संजीव कुलश्रेष्ठ पुखरायां ने पढ़ा- खयाल में ही सही ऐतबार कर लेना, जुदाई से भी उसी तरह प्यार कर लेना। प्रख्यात मिश्रा लखनऊ ने सुनाया- बोटी बोटी कट जाऊं इंच इंच बट जाऊं, लाड़ला न पुरखों की नाक को कटाऊंगा।
विकास बौखल बाराबंकी ने वीररस बांचा-हिंद वालेे शेर पाक जाके दहाड़ देंगेे, गीदड़ तुम्हारे येे बेेचारेे मर जाएंगेे। राधिका मित्तल दिल्ली ने शृंगार की रचना पढ़ी, जरा सी बात पे हमसेे खफा होना नहीं अच्छा, जो बरसों की मोहब्बत हैै उसे खोना नहीं अच्छा। ऋतु चतुर्वेदी कोंच, वैभव दुबे झांसी, अंकित चक्रवर्ती पीलीभीत, रंजना सिंह लखीमपुर खीरी, नरेंद्र मित्र आदि ने रचनाएं पढ़ी। संचालन अर्जुन सिंह चांद ने किया। इस दौरान प्रदीप गुप्ता, नरेश वर्मा, सुनील शर्मा, पवन झा, डॉ. दिनेश उदैनिया, अंशुल मिश्रा, अनिल नगाइच, डॉ. सुशील तिवारी, डॉ. अजय तिवारी, निर्भय यादव, आनंद पांडे, दिनेश मानव, धर्मेंद्र बबेलेे, मोहन नगाइच, भास्कर सिंह माणिक्य आदि रहे।