उरई। घर में घुसकर हत्या के मामले में दो भाइयों समेत चार दोषियों को अपर जिला जज प्रथम सुरेश चंद्र ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 22-22 हजार रुपये का अर्थदंड भी देना होगा। मामला करीब 23 साल पुराना है।
मामले की पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता मोतीलाल पाल ने बताया कि रेंढर थाना क्षेत्र के डाबर निवासी नीरज गोस्वामी ने 24 मई 1999 को रेंढर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में था कि पिता गोपीनाथ घर में चारपाई पर लेटे थे। उनके पास लाइसेंसी बंदूक भी थी। तभी गांव के मुलू व बाबूराम व देवप्रसाद घर में घुस आए और गोपीनाथ को कुल्हाड़ी से मारने लगे। शोरगुल सुनकर बेटे नीरज ने बीचबचाव करना चाहा तो हमलावरों ने उसके साथ भी मारपीट की। यही नहीं परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी हमलावरों ने मारपीट की। इसी बीच हमलावरों का साथी मंगली भी आ गया और उसने भी कुल्हाड़ी से नीरज, चाची मालती को चोट पहुंचाई। शोरशराबा सुनकर लोगों को आता देखकर हमलावर भाग गए। परिजनों ने पुलिस को सूचना दी और गोपीनाथ को अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टर ने गोपीनाथ को मृत घोषित कर दिया। दोनों पक्षों के गवाहों और अधिवक्ताओं की जिरह के बाद बुधवार को अपर जिला जज प्रथम सुरेश चंद्र प्रथम ने मुलू और उसके भाई बाबूराम के अलावा देवप्रसाद और मंगली को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई।