भागवत कथा सुनाते डॉ राम कमल दास वेदांती
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उरई। काशी पीठाधीश्वर डा. रामकमल दास वेदांती ने कहा कि श्रीमद्भागवत के उपदेशों के अनुसार मर्यादित जीवन जिया जाए तो हमारा वर्तमान भी सुधर सकता है। उन्होंने कहा कि आज श्रोता सिर्फ यह समझते हैं कि कथा सुनने से ही लाभ हो जाएगा, जबकि उसे आचरण में उतारने की जरूरत है। जब तक कथाओं को आचरण में नहीं उतारा जाएगा, तब तक भला नहीं होने वाला।
बघौरा बाईपास स्थित रघुनाथेश्वर मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन डा. वेदांती ने कहा कि जिस तरह शरीर को पुष्ट करने के लिए भोजन की आवश्यकता है, उसी तरह आध्यात्म को पुष्ट करने के लिए भजन की जरूरत है। उन्होंने श्रीकृष्ण अवतार की मंगलमयी कथा सुनाई। इसके बाद पूरे विधि विधान से श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। यजमान अनिल यादव ने कथा व्यास को पगड़ी पहनाकर नंद बाबा का रूप धारण कराया। बधाइयों पर नाचती थिरकती महिलाओं व श्रोताओं से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। इस दौरान आरती, केशव यादव, जयप्रकाश, शरद श्रीवास्तव, विजय यादव, रामबाबू सिंह, रामबल्लभ सिंह, त्रिलोकी सिंह, रामदास शास्त्री आदि रहे।