उरई। जेलों में बंदियों की संख्या को देखते हुए कोरोना सक्रंमण से बचाव के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में 20 विचाराधीन बंदी जिला कारागार से रिहा किए जा चुके हैं। मंगलवार को नौ सजायाफ्ता बंदी भी पैरोल पर छोड़े गए हैं। न्यायालय ने सात साल की सजा प्राप्त या विचाराधीन अथवा सिद्धदोष बंदियों को अंतरिम जमानत पर निर्धारित अवधि के लिए छोड़ने के आदेश दिए है। इसके बाद उन्हें संबंधित न्यायालय में आत्मसमर्पण कर नियमित जमानत के लिए प्रार्थनापत्र प्रस्तुुत करना होगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव महेंद्र कुमार रावत ने बताया कि इस सुविधा का लाभ उन्हीं कैदी को मिलेगा, जिनका नियमित प्रार्थनापत्र किसी न्यायालय में लंबित न हो। (संवाद)
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सुविधाएं न मिलने पर ग्रीवांस कमेटी से करें शिकायत
उरई। जिले में यदि किसी नागरिक को किसी सरकारी या निजी अस्पताल में कोविड 19 के उपचार संबंधी कोई भी समस्या या शिकायत हो। तो वह अपनी शिकायत पेंडमिक पब्लिक ग्रीवांस कमेटी को दे सकता है। कोरोना रोगी को यदि प्राथमिक उपचार, दवाएं, इंजेक्शन एवं ऑक्सीजन आदि सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हों। तो कमेटी के संज्ञान में समस्या लाकर दूर किया जाएगा। सिविल जज महेंद्र कुमार ने बताया कि क्वारंटीन सेंटर की स्थितियों और कोरोना पॉजीटिव रोगियों को बेहतर चिकित्सीय उपचार हाईकोर्ट इलाहाबाद द्वारा आदेश पारित किया गया है। जिला स्तर पर तीन सदस्यीय कमेटी का गठन जनपद न्यायाधीश अशोक कुमार सिंह ने किया। इस समिति में सिविल जज महेन्द्र कुमार रावत, अपर जिला मजिस्ट्रेट प्रमिल कुमार सिंह मोबाइल 9454417619, मेडीकल कालेज के उपप्राचार्य डॉ आरएन कुशवाहा 8853235555 को नामित किया गया है। इस कार्य के पर्यवेक्षण के लिए विशेष न्यायाधीश डकैती सुरेश चन्द्र को नोडल ऑफिसर नामित किया। (संवाद)
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कोर्ट में सुनवाई 5 के बाद
उरई। जनपद न्यायाधीश अशोक कुमार सिंह ने बताया कि न्यायालय में 10 मई से 4 जून तक अवकाश घोषित किया गया है। इस दौरान आवश्यक मामलों को छोड़कर अन्य सुनवाई नहीं होगी। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि वादकारियों को 5 जून के बाद की तारीख सुनवाई के लिए नियत करें। (संवाद)