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बेटियों को भी दें लड़कों के सम्मान सुविधाएं

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उरई। गर्भ में पल रही बालिका को भी जन्म लेने का हक है। इसलिए उसे न मारें। बल्कि उसे समान से जन्म लेने दें और लड़कों की तरह उसे भी पढ़ाकर लिखाकर सभी अधिकार व सुविधाएं दें जो लड़कों को दिए जाते हैं। यह बात जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रेनू यादव ने सदर तहसील सभागार में प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में कही।
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सचिव रेनू यादव ने तहसील कर्मचारियों को बताया कि भारत में लिंग चयन, प्रसव पूर्व एवं प्रसव उपरांत, कन्या भ्रूण हत्या रोके जाने के लिए पीसीपीएनडीटी एक्ट को लागू किया गया है। ऐसा इसलिए कि समाज में लड़के व लड़की की संख्या का अनुपात जिसे लिंगानुपात कहा जाता है, संतुलित बना रहे। तहसीलदार कुमार भूपेंद्र ने कहा कि गर्भस्थ शिशु की हत्या वैधानिक, सामाजिक और शास्त्रीय रूप से भी अपराध है। यह पाप की श्रेणी में आता है। इसलिए बचाव की आवश्यकता है। बेटियों को बचाने और उन्हें पढ़ाने की जरूरत है ताकि भारत एक सभ्य व शिक्षित समाज बन सके। इस दौरान समाज कल्याण अधीक्षक देवेंद्र त्रिवेदी, प्रोबेशन कार्यालय से जूली, इरफान मंसूरी आदि मौजूद रहे।
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