उरई। आधी आबादी कहलाने वाली महिलाओं पर तीन पार्टियों ने दांव खेला, पर मतदाताओं ने उनके पक्ष में मतदान नहीं किया। दो निर्दलीय समेत छह महिलाएं चुनाव मैदान में उतरी थीं। इनमें से सिर्फ माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी ही मुख्य मुकाबले में दिखीं। बाकी सभी अपनी जमानत तक नहीं बचा सकीं।
हर क्षेत्र में महिलाओं को बराबर की भागीदारी देने की अक्सर मांग होती रहती है। राजनीति में महिलाओं का दखल बनाने पर भी जोर दिया जाता है। इस बीच कांग्रेस ने उरई सदर और कालपी में महिला कार्ड खेला। फिर भी कांग्रेस अपनी जमीन बचाने में सफल नहीं हो सकीं। दोनों प्रत्याशी चौथे स्थान पर रहीं। उरई सदर से कांग्रेस के की प्रत्याशी उर्मिला खाबरी को मात्र 4650 वोट मिले।
इसी सीट से आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी दीपशिखा 1088 वोट ही पा सकीं ।
वहीं, सदर सीट से ही निर्दलीय प्रेमलता को 882 वोट मिले। 2012 में कांग्रेस से विधायक रह चुकीं उमाकांति सिंह इस बार सिर्फ 15195 वोटों में सिमट गईं। इसी सीट से निर्दलीय प्रत्याशी अंजना देवी को 1114 वोट मिले। उधर, माधौगढ़ से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं शीतल कुशवाहा ने मौजूदा विधायक और भाजपा के प्रत्याशी को शुरुआत में कड़ी टक्कर दी, लेकिन आधे राउंड के बाद ही मूलचंद्र निरंजन ने बड़ी लीड लेकर इन्हें पीछे कर दिया। 70 हजार 225 वोट पाकर शीतल कुशवाहा दूसरे स्थान पर रहीं।